जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से एक मरीज की जान पर बन आई। सोमवार को डॉक्टरों ने एंबुलेंस की जगह खुद की गाड़ियां खड़ी कर दीं। इस वजह से कई एंबुलेंस को अस्पताल परिसर से बाहर खड़ा करना पड़ा। वहीं, एक एंबुलेंस डॉक्टरों की गाड़ियों की वजह से परिसर में ही फंस गई। इसमें रेफर मरीज दिल्ली के अस्पताल जाने के लिए बैठा हुआ था। ड्राइवर गाड़ी हटवाने के लिए अस्पताल में डॉक्टर को ढूंढता रहा। बड़ी मुश्किल से गाड़ी हट पाई।
जिला अस्पताल के डॉक्टर अपनी गाड़ियां एंबुलेंस की पार्किंग में खड़ी करते हैं। इस वजह से परिसर में एंबुलेंस खड़ी करने के लिए जगह नहीं बचती। मुश्किल से एक -दो एंबुलेंस ही अंदर खड़ी हो पाती हैं। इनके आगे-पीछे भी डॉक्टर गाड़ी खड़ी कर देते हैं, इस वजह से ये एंबुलेंस नहीं निकल पाती हैं।
बुधवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। खोड़ा कॉलोनी में रहने वाली आसमां के पति ने उसकी चाकू से नाक काट दी थी। काफी खून बह रहा था। परिजन आसिफ ने बताया कि सुबह 9 बजे अस्पताल में आ गए थे। इमरजेंसी डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज देने के बाद दिल्ली रेफर कर दिया। उसके बाद एंबुलेंस में बिठा दिया, लेकिन एंबुलेंस के पीछे गाड़ी खड़ी होने की वजह से एंबुलेंस निकल नहीं पा रही थी। ड्राइवर डॉक्टर को ढूंढता रहा। बाद में जाकर डॉक्टर मिली और गाड़ी को हटाया गया। करीब 12 बजे मरीज को लेकर एंबुलेंस गई। इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों को कई बार बोला गया है कि एंबुलेंस की जगह पर गाड़ी नहीं लगाया करें। इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल के बाहर मिलती हैं एंबुलेंस
डॉक्टरों की गाड़ियों की वजह से 108 और 102 नंबर की एंबुलेंस परिसर से बाहर खड़ी रहती हैं। इन एंबुलेंस की सेवा लेने के लिए अस्पताल के बाहर गेट पर जाना पड़ता है, तब जाकर एंबुलेंस मिल पाती है।