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दो महिला सांसदों को छोड़ने पड़ेंगे बड़े सरकारी बंगले

Fri, 31 Jul 2015 01:19 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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राज्यसभा सदस्य व पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी व कुमारी सैलजा को अब टाइप-8 के सरकारी बंगलों को छोड़कर टाइप सात के बंगलों में स्थानांतरित होना होगा।

हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इतना ही नहीं अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ के समक्ष दोनों ने इस्टेट निदेशालय के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें टाइप सात बंगलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

'मामले को राजनीतिक मकसद देने का प्रयास किया'

अदालत ने कहा कि उनकी नजर में निदेशालय के फैसले में कोई खामी नहीं है और याची टाइप आठ बंगलों में रहने की हकदार नहीं हैं।

अदालत में याची यह आरोप साबित नहीं कर पाए कि अन्य राजनीतिज्ञों ने भी बंगलों पर अनधिकृत कब्जे कर रखे है और सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। अदालत ने कहा कि याची ने मामले को राजनीतिक मकसद देने का प्रयास किया है।

अदालत ने याची के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिक संसद के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं ताकि कानून व्यवस्था के लिए कानून बनाए जा सके और सरकारी कामकाज हो।
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'कानून सब पर लागू होते हैं'

ऐसे प्रतिनिधि यह नहीं कह सकते कि कानून दूसरों के लिए है और उन पर लागू नहीं होते। अदालत ने अंबिका सोनी व सैलजा को जुर्माने की राशि निदेशालय में जमा करवाने का निर्देश दिया है।

अंबिका सोनी व सैलजा वर्तमान में 22 अकबर रोड व 7 मोती लाल नेहरू मार्ग पर स्थित टाइप-8 के सरकारी बंगलों में रह रही हैं। यह बंगले उन्हें यूपीए सरकार में बतौर मंत्री आवंटित किए गए थे।

अब केंद्र सरकार ने उन्हें क्रमश: 84 लोधी एस्टेट व एबी-14 मथुरा रोड स्थित टाइप सात के बंगले आवंटित किए हैं।सोनी व सैलजा की तरफ से अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने अदालत में दलीलें पेश कीं।
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