लोकसभा चुनाव में मतदान के दौरान उम्र की सीमा पर वोट का जोश भारी पड़ा। सुबह से ही बुजुर्ग मतदाता काफी संख्या में वोट करने पोलिंग स्टेशन पर पहुंचने लगे। पालम गांव के पोलिंग स्टेशन पर मतदान करने पहुंची 92 साल की इंद्रावती ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री से लेकर अभी तक के प्रधानमंत्री को हर बार वोट करने का मौका मिला। कभी ऐसा नहीं हुआ कि वह वोट करना भूल गईं। चाहे शरीर किसी भी हालत में रहे। सुबह सबसे पहले मतदान करके आती हूं।
ओखला निवासी 70 साल की चांद बानो ने कहा कि मतदान करना हमारा कर्तव्य है और इससे वह कभी पीछे नहीं हटतीं। हमारा भविष्य कैसा होगा यह मेरा वोट ही तय करेगा। फिर इस पुनीत काम से मैं पीछे कैसे हट सकती हूं। शालीमार बाग में वोट करने पहुंचे 84 साल के सतीश कुमार ने कहा कि भविष्य को बनाने में उम्र बाधा नहीं बनती, बल्कि बढ़ती उम्र का अनुभव नई पीढ़ी को दिशा देता है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि पूरे जोश के साथ युवाओं के लिए प्रेरणा बनें। पूर्वी दिल्ली स्थित वसुंधरा एनक्लेव में रहने वाले 83 साल के कमल कुमार ने कहा कि वोट देने का जो जोश पहले था आज भी वैसे ही है। हमारी कोशिश है कि युवा भी हमें देखकर वोट करने आगे आए, ताकि भविष्य में कैसी सरकार हो यह उनका वोट तय करें। 73 साल के बी गांगुली ने कहा कि वोट हमारा कल तय करता है। कल कैसा होगा इसके लिए हम जिम्मेदार है। यदि आज जोश न दिखाए तो कल शिकायत करने का अधिकार भी नहीं रहता।
मतदाताओं में वोट करने का जोश कुछ कदर दिखा कि बीमारी भी उन्हें घर पर रोक नहीं सकी। शिव विहार में वोट करने पहुंचे 70 साल के नबी सयर को 4 साल से लकवा है। फिर भी पूरे जोश के साथ वोट करने बूथ पर पहुंचे। वेस्ट विनोद नगर में मतदान करने पहुंचे 24 साल के दिव्यांग निशांत पैरों से चल नहीं पाते, लेकिन बहन के साथ सबसे पहले वोट करने पहुंचे। उनका कहना है कि वह कभी वोट करने से पीछे नहीं हटते। उत्तम नगर में वोट करने पहुंचे मोहम्मद अशफाक ने कहा कि दिव्यांगता जिम्मेदारी निभाने के आड़े नहीं आती।
वोट डालते ही हुईं बेहोश
नंद नगरी में वोट करने आईं 48 साल की माला मतदान करने के दौरान बेहोश हो गई। उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा दी गई। वहीं, द्वारका के सीआरपीएफ स्कूल में वोट करने पहुंचीं 65 साल की महिला वोट करने के कुछ देर बाद ही बेहोश हो गई। निगम के वालंटियर मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।