मद्धम रोशनी के बीच मंच से दिल के तार को झंकृत करती तीन पीढ़ियों की वायलिन की धुन, तबले की थाप और संगीत प्रमियों के तालियों की संगत ने शुक्रवार की शाम को यादगार बना दिया। मौका था अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह का। सेक्टर-125 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस शानदार कार्यक्रम को मोबाइल में कैद कर हर कोई यादों में संजोना चाह रहा था।
शब्द सम्मान में हर किसी को विख्यात वायलिन वादक पद्म भूषण डॉ. एन. राजम का इंतजार था। यही वजह थी कि शाम होते ही ऑडिटोरियम संगीत और साहित्य प्रेमियों से भर गया था। पद्मभूषण डॉ. एन. राजम, उनकी बेटी संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर ने एक साथ जब मंच साझा किया तो दर्शक संगीत के राग और ताल को महसूस कर रहे थे। वायलिन पर राग श्याम कल्याण से लेकर मीरा के भजनों की प्रस्तुति हुई।
उन्होंने पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...की धुन छेड़ी तो ऐसा लगा मानो भक्ति के भावों ने सुरों का स्वरूप ले लिया। तीन पीढ़ियों का वायलिन वादन एक अद्वितीय और मंत्रमुग्ध करने वाला अनुभव रहा। उनकी उंगलियों की गति और संगीत की गहराई श्रोताओं को एक नई दुनिया में ले गई।
तबले पर अभिषेक ने दिखाया जादू
समारोह में बनारस घराने के तबला साधक अभिषेक मिश्र ने तीन ताल में पेशकार, रेले, कायदे, पलटे, पारम्परिक उठान बहुत खूबसूरती से पेश किया । उन्होंने वायलिन की संगत में बनारस घराने की कुछ प्राचीन गतें, रेले इत्यादि पेश करके खूब तालियां बटोरीं । अभिषेक के सधे हुए वादन में उनकी विशिष्ट शैली की झलक दिखाई दी।
बच्चों को भी दें कला का ज्ञान
प्रस्तुति के दौरान डॉ. संगीता शंकर ने कहा कि हमें इस कला को प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ियों में भी यह हस्तांतरित हो सके। उन्होंने कहा कि माता पिता को अपने बच्चों को इस कला के बारे में बताना और इसका ज्ञान दिलवाना चाहिए।
...ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए
समारोह स्थल पर मौजूद सुधी श्रोताओं ने कहा कि हम जिन महान संगीतकारों से मिलने का कभी सोच नहीं सकते थे, अमर उजाला ने हमें उनसे मिलने का मौका दिया है। नोएडा के सेक्टर-110 स्थित लोटस पनाश सोसाइटी से आईं निधि शर्मा ने बताया कि जब तीनों पीढ़ियां एक साथ वायलिन बजा रही थीं तब ऐसा लग रहा था मानों हम किसी और दुनिया में आ गए हों। गुरुग्राम से आईं मनोवैज्ञानिक प्रतिभा कोटक ने बताया कि धुन ने सभी को बांध दिया था। कोई भी अपनी सीट से उठना नहीं चाह रहा था।
सेक्टर 119 स्थित आम्रपाली प्लेटिनम सोसाइटी के एओए अध्यक्ष आदित्य वशिष्ठ और सचिव डॉ. अजीत सिंह ने कहा कि हम संगीत प्रेमी हैं और इस कार्यक्रम को सुनने का अवसर मिला है तो यह हमारे लिए यह एक सौभाग्य की बात है। होम्स 121 सोसाइटी के एओए अध्यक्ष दिनेश सिंह ने कहा कि कार्यक्रम सुनकर ऐसा लग रहा था कि ऐसा संगीत कभी खत्म न हो। नोएडा हाईराइज फेडरेशन के अध्यक्ष निखिल सिंघल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए।
संगीत सुनने पहुंचीं तीन पीढ़ियां
तीन पीढ़ियों के वायलिन की धुन को सुनने के लिए सास, बहू और बेटी साथ पहुंची थीं। डेजी यादव, निवेदिता सिंह और अरिका ने बताया कि इस कार्यक्रम को कभी भूल नहीं सकतीं। हमने पहले ही तय कर लिया था कि एक साथ जाएंगे।
संगीतकारों के साथ सेल्फी
कार्यक्रम के अंत में हर कोई पद्म भूषण डॉ. एन. राजम, पुत्री डॉ. संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर के साथ एक सेल्फी लेने के लिए उत्साहित दिखा। हर कोई एक बार उन्हें मिलकर यह भी बताना चाह रहा था कि वह उनका कितना बड़ा प्रशंसक है।