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हिंदी हैं हमः दुनियाभर में रोजगार की भाषा बनकर उभर रही है हिंदीः माधव कौशिक

Sat, 22 Aug 2020 04:43 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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माधव कौशिक - फोटो : amar ujala
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यदि कंप्यूटर की मौलिक अवधारणाएं हिंदी में आने लगें और हिंदी में ही प्रोग्रामिंग हो तो आने वाला दशक हिंदी का है। साथ ही हिंदी को वैश्विक बाजार भी मिलना जरूरी है। जन-जीवन के बीच हिंदी का वर्चस्व बहुत है, लेकिन सरकारी कामकाज भी हिंदी में होना जरूरी है। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे 'हिंदी हैं हम' अभियान के तहत शुक्रवार को हुई बातचीत के दौरान साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मौजूदा सदस्य माधव कौशिक ने यह बातें कहीं।

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माधव कौशिक ने कहा कि संचार क्रांति के दौर में सभी भाषाओं का क्रांतिकारिक विकास हुआ है। इनमें हिंदी सबसे ऊपर है। आज अंग्रेजी चैनलों को हिंदी में प्रसारण और अंग्रेजी प्रकाशकों को हिंदी में प्रकाशन करने पर मजबूर होना पड़ा है। बीबीसी, स्टार, नेशनल जियोग्राफी और डिस्कवरी जैसे चैनल अपने कार्यक्रमों को हिंदी में डब करके प्रसारित कर रहे हैं। पैंगुविन जैसे प्रकाशकों ने हिंदी में पुस्तकें छापनी शुरू कर दी हैं। दुनिया के लगभग 122 देशों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। 

यह सच है कि आज दुनियाभर के अलावा दक्षिण भारत में भी लोग हिंदी का ट्यूशन ले रहे हैं। दुनियाभर में हिंदी रोजगार की भाषा बनकर उभर रही है। इसे तरह से भी समझा जा सकता है कि आज बड़ी से बड़ी हॉलीवुड की फिल्में रिलीज होते ही हिंदी में डब की जाती हैं। जिसके लिए दुनियाभर में हिंदी के जानकार युवाओं को रोजगार प्राप्त हो रहा है। देश के अंदर भी हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। लेकिन अधिकतर काम सहभाषा अंग्रेजी में होता है। इस कार्यप्रणाली में बदलाव जरूरी है। अब नई शिक्षा नीति लागू हो जाने के बाद यह तय है कि आने वाला दशक हिंदी का होगा।

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