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अमर उजाला अभियान: मैं विकास मार्ग हूं ...क्या कोई सुनेगा मेरी पीड़ा

Mon, 21 Sep 2020 05:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
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विकास मार्ग... - फोटो : अमर उजाला
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मैं चलता ही जाता हूं, किलोमीटर दर किलोमीटर। कड़कड़डूमा गांव से प्रीत विहार, निर्माण विहार, लक्ष्मी नगर व शकरपुर को एक-दूसरे से जोड़ता, अपने दूसरे छोर आईटीओ तक। मैं विकास मार्ग हूं, पूर्वी दिल्ली की जीवन रेखा। काला, लेकिन मनमोहक मेरा रूप है ही, मेरे होने से ही यह इलाका आबाद है।

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प्रीत विहार, निर्माण विहार जैसे विहारों वाली पॉश कालोनियां, बड़ी-बड़ी कोठियां मेरे नजदीक हैं तो सबसे पुराना कड़कड़डूमा गांव भी मेरा अपना है। देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली में पहुंचा एक तबका लक्ष्मी नगर, शकरपुर की तंग गलियों में रहता है। इन सबका अपना मिजाज है।

मेरे होने से पूर्वी दिल्ली छोटी से हो जाती है। मैं बिछड़ों को मिलाता हूं, अपनों को पास लाता हूं। युवाओं की तकदीर भी बनती है, मेरे नजदीकहोकर, लक्ष्मी नगर कोचिंग हब से। इस तरह से हर मजहब का, हर राज्य का नाता है मुझसे।
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मेरा रूप भी समय-समय पर बदला है। पिछली सदी के पांचवें दशक में पगडंडी  सरीखा था। धीरे-धीरे बदलाव आया और आज आठ लेन चौड़ा हो गया हूं। यही    नहीं, करीब दस साल पहले मुझे मेट्रो से भी जोड़ा गया। मेरे ऊपर एक मंजिल खड़ी करके। मेट्रो चली तो बेरोकटोक चलती गई, लेकिन मेरी चाल बेदम हो चली है इस वक्त, वाहनों के बढ़ते दबाव से सांस तो मेरी कड़कड़डूमा से ही फूलने लगती है, एक के बाद एक पड़ने वाली रेड लाइट में फंसने से व बिना इजाजत पार्किंग बन जाने से। बीच-बीच में मुझ पर दुकानदारी भी आम है। 

लेकिन सांस यमुना पुल पर पहुंचने से पहले रूक सी जाती है। पूरी तरह पस्त हो जाता हूं। अमूमन आधा किमी निकलने में ही आध घंटा लग जाता हैं। फिर भी, मैं हूं। क्योंकि बड़ी आबादी पर बुरा असर पड़ेगा, मेरे, विकास मार्ग के न होने से।
   
लाइवः कड़कड़डूमा से आईटीओ का सफर

  • 10 किमी प्रति घंटा भी नहीं रहती वाहनों की रफ्तार:
  •  सात किमी लंबी सड़क पर एक के बाद एक पड़ते छह सिग्नल। 
  •  निर्माण विहार सिग्नल पर लगा 7 मिनट तो कड़कड़डूमा पर 5 मिनट का समय, लक्ष्मी नगर व प्रीत विहार सिग्नल पर लगा 3 मिनट का समय। आईटीओ बत्ती पर रेंग रहे थे वाहन।
  •  सड़क की खुदाई होने से लक्ष्मी नगर व शकरपुर में ट्रैफिक बाधित, लगा  करीब पंद्रह मिनट का समय।
  •  कड़कड़डूमा से लक्ष्मी नगर के करीब पांच किमी हिस्से में होती जगह-जगह अवैध पार्किंग व अतिक्रमण, मेट्रो स्टेशन पर मुख्य सड़क पर खड़े होते रिक्शा व ई-रिक्शा।
  •  नतीजन पीक आवर्स में लगा करीब एक घंटा व नॉन पीक आवर्स में 35-40 मिनट का समय।


मामूली फेरबदल से तकनीक दे सकती है समाधान
    विकास मार्ग के सिग्नल एक के बाद एक पड़ते हैं। दूरी कम होने से    सभी सिग्नल को एक-दूसरे से सिंक्रोनाइज किया जा सकता है। इससे एक बार    सिग्नल ग्रीन मिलने पर अगली सिग्नल पर ट्रैफिक नहीं रूकेगा। हालांकि,    इसके लिए सड़क से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटानी पड़ेगी।
-पवन गुप्ता, ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट

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फल-सब्जियों की कीमत में भी खासा अंतर

विकास मार्ग पर कड़कड़डूमा गांव जैसा इलाका है तो विहारों वाली पॉश कालोनियां भी। लक्ष्मी नगर व शकरपुर में मध्यम आय वर्ग के लोग रहते हैं। रिहायश के इस फर्क का असर वहां मिलने वाले सामान पर पड़ता है। कड़कड़डूमा से लक्ष्मी नगर के बीच की दूरी महज पांच किमी है, लेकिन इस बीच कीमतें तीन बार बदलती हैं और फर्क प्रति किग्रा दस रुपये तक का हो जाता है। सबसे ज्यादा महंगाई पॉश कालोनियों में है। जबकि सबसे कम कड़कड़डूमा गांव के नजदीक, यहां मोल भाव की ज्यादा गुंजाइश दिखी।

ज्यादा क्रय शक्ति वाली आबादी में चीजें मिलती महंगी
 सड़क अच्छी है तो समाज के हर तबके की आवाजाही में सहूलियत होती है। शिक्षा स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है। इसी से जुड़ी आर्थिक गतिविधि भी है। जिस इलाके के क्रय शक्ति ज्यादा है, वहां तुलनात्मक रूप से महंगी मिलती हैं। विकास मार्ग पर कीमतों का इस तरह का फर्क इसी दिशा में इशारा करता है।
-प्रो. सुनील सिंह, आर्थिक विशेषज्ञ
  
मेट्रो ने दिया हरियाली बढ़ाने का अवसर, प्रदूषण पर पड़ा असर
विकास मार्ग पर पूरे हिस्से में हरियाली पर्याप्त है। डिवाइड के साथ झाडिय़ां व फुटपाथ पर जगह-जगह पर पेड़ लगे हैं। कड़कड़डूमा से लक्ष्मी नगर के बीच मेट्रो ट्रैक के नीचे की पूरी जगह झाडिय़ों से भरी है। जबकि उससे आगे आईटीओ तक घने पेड़-पौधे हैं। पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था इकोस्फेयर के प्रशांत गुंजन का कहना है कि सड़क के किनारे लगी हरियाली प्रदूषण को सीमित करने पर अहम भूमिका निभाती है। पेड़ व झाड़ी की पत्तियां धूल के साथ वाहनों से निकलने वाले नुकसानदेह प्रदूषकों को हवा से घुलने से रोक देती है। नतीजन वायु प्रदूषण काफी हद तक नियंत्रित रहता है।
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