चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा के वकील ने पुलिस द्वारा उन पर लगाए आरोपों को गलत बताया है। अधिवक्ता अदिश अग्रवाल ने कहा कि हम इस बात को नहीं नकार रहे हैं कि वह चीनी न्यूज संगठन के लिए काम कर रहे थे, लेकिन पुलिस द्वारा उन पर लगाए आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को उनके मुवक्किल के घर की तलाशी में कोई सबूत नहीं मिले। इसके बावजूद उन्हें फंसाया जा रहा है।
अग्रवाल ने कहा कि जिस समय पुलिस ने राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया था उस समय मीडिया को जानकारी दी जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया। इस मामले में रक्षा मंत्रालय के किसी भी अधिकारी से पूछताछ नहीं की जा रही है। राजीव शर्मा के पास मिले दस्तावेज उन्हें किसी ओर से ही मिले होंगे, न कि उन्होंने अपने घर पर छापे होंगे। अग्रवाल ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद पत्रकार के पास उनके परिवार को जाने की इजाजत नहीं दी गई और न ही यह बताया कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया है।
एफआईआर की कॉपी भी ऑनलाइन नहीं मिली थी। जब पत्रकार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया तब भी उन्हें कोई वकील उपलब्ध नहीं कराया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास सिर्फ इतनी जानकारी है कि राजीव शर्मा किसी चीनी न्यूज संगठन के साथ काम कर रहे थे। उन्होंने कहा जमानत के लिए अर्जी दायर की है, जिस पर 22 सितंबर को सुनवाई होगी। उन्होंने कहा कि पत्रकार राजीव शर्मा की समाज में प्रतिष्ठा है। उनकी पत्नी दिल्ली विश्वविद्यालय के वेंकटेश्वर कॉलेज में प्रोफेसर हैं। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया से भागने की संभावना नहीं है। इस मामले में सबूतों से भी छेड़छाड़ की संभावना नहीं है। जब भी आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा वह हाजिर होंगे।