जम्मू-कश्मीर सरकार ने रोशनी एक्ट के तहत उच्च न्यायालय के फैसले को लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत इसे असांविधानिक करार दिया गया है। सरकार ने एक्ट के तहत की गई सभी कार्रवाई को रद्द करने का आदेश जारी किया है। साथ ही सभी दाखिल खारिज को रद्द कर छह महीने के भीतर सभी जमीन को वापस लेने का आदेश दिया है। इसके साथ ही एक्ट के तहत लाभ लेने वाले प्रभावी लोगों समेत सभी लाभार्थियों के नाम सार्वजनिक करने को कहा गया है। उप राज्यपाल की सहमति से कानून तथा संसदीय कार्य विभाग ने शनिवार यह आदेश जारी किया।
आदेश में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए यह जरूरी है कि आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इसके तहत राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से एक्ट के तहत समय समय पर किए गए संशोधन को रद्द करने का आदेश जारी होगा। सरकारी जमीन पर कब्जाधारकों से जमीन छुड़ाने की कार्ययोजना बनाने के साथ ही छह महीने के भीतर ऐसे सभी भूमि को वापस हासिल किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि राजस्व विभाग साप्ताहिक आधार पर आदेश के तहत की गई कार्रवाई का ब्योरा सामान्य प्रशासन विभाग के साथ साझा करेगा।
2001 के आधार पर सरकारी जमीन का ब्योरा जारी करने के आदेश
आदेश में कहा गया है कि प्रमुख सचिव राजस्व विभाग एक जनवरी 2001 के आधार पर सरकारी जमीन का ब्योरा एकत्र कर उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे। साथ ही जमीन पर अवैध कब्जाधारकों के नाम भी सार्वजनिक करेंगे। इसमें रोशनी एक्ट के तहत आवेदन प्राप्त होने, जमीन का मूल्यांकन, लाभार्थी की ओर से जमा धनराशि, एक्ट के तहत पारित आदेश का भी ब्योरा देना होगा। साथ ही यदि जमीन किसी के नाम हस्तांतरित की गई होगी तो उसका विवरण भी देने को कहा गया है।
लाभ लेने वाले प्रभावी लोगों के नाम भी सार्वजनिक होंगे
आदेश में कहा गया है कि पूर्व मंत्रियों, विधायकों, ब्यूरोक्रेट, सरकारी कर्मचारी, पुलिस अफसरों, उद्योगपतियों, व्यापारियों समेत सभी प्रभावी लोगों के नाम भी सार्वजनिक करने को कहा गया है। इतना ही आदेश में यह भी कहा गया है कि ऐसे लोगों के रिश्तेदारों तथा परिवार से जुड़े अन्य लोगों के नाम पर बेनामी सरकारी भूमि को भी सार्वजनिक करने को कहा गया है। यह कार्रवाई एक महीने में पूरे करने को कहा गया है।
मंडलायुक्त कोर्ट में सौंपेंगे रिपोर्ट
जम्मू और कश्मीर के मंडलायुक्त को रोशनी एक्ट के अलावा सरकारी जमीन पर जिलावार कब्जे का ब्योरा सौंपने की हिदायत दी गई है। कब्जा करने वालों लोगों तथा जमीन का पूरा विवरण भी देने को कहा गया है। इस सूचना को भी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा।
तीन सप्ताह पहले हाईकोर्ट ने दिया सीबीआई जांच का आदेश
हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह पहले 9 अक्तूबर को रोशनी एक्ट घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल तथा न्यायाधीश राजेश बिंदल ने जांच एजेंसी को प्रत्येक आठ सप्ताह में कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इस आदेश के बाद राज्य पुनर्गठन के एक साल पूरे होने पर सरकार ने शनिवार को आदेश को लागू करते हुए एक्ट के तहत की गई पूरी कार्रवाई को ही रद्द कर दिया था।
20.55 लाख कनाल जमीन एक्ट के तहत आवंटित
रोशनी एक्ट के तहत 20.55 लाख कनाल (102750 हेक्टेयर) सरकारी जमीन लोगों को औने पौने दाम में आवंटित कर दिया गया। इसमें से मात्र 15.58 प्रतिशत जमीन को ही मालिकाना हक के लिए मंजूरी दी गई। योजना का उद्देश्य था कि जमीन के आवंटन से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल राज्य में बिजली ढांचे को सुधारने में किया जाएगा। इस एक्ट के तहत रसूखदारों ने अपने तथा अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन आवंटित करा ली।
सत्यपाल मलिक ने योजना की थी रद्द
योजना के तहत कम राजस्व प्राप्त होने तथा उद्देश्यों के नाकाम होने पर पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 28 नवंबर 2018 को इस योजना को रद्द कर दिया था। कोर्ट में एडवोकेट अंकुर शर्मा की ओर से इस संबंध में पीआईएल दाखिल किया गया था।