एम्स में मानसून और त्योहार सीजन में आंखों की देखरेख के लिए जागरूकता पर हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मानसून और त्योहारी सीजन में आंखों की देखभाल को लेकर एम्स में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के उपलक्ष्य में सोमवार को पब्लिक लेक्चर आयोजित किया गया। इसमें लोगों को आंखों की देखभाल करने, नेत्रदान सहित कई बीमारियों पर जागरूक किया गया है। इस दौरान मानसून में बच्चों और युवाओं में एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस होने की जानकारी दी गई।
एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रीदेवी नायर ने कहा कि इस मौसम में आंख की दिक्कत सबसे ज्यादा होती है। इसमें कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस प्रमुख है। सर्जरी के बाद आंखों की देखरेख और कॉन्टैक्ट लेंस के इस्तेमाल भी मानसून में सावधानी के साथ करना चाहिए। आईफ्लू होने पर आंखों में लालीपन, पानी आने और उसके चिपकने की समस्या देखने को मिलती है।
यह आंखों को देखने से नहीं बल्कि स्पर्श से फैलता है। स्कूल, भीड़भाड़, दफ्तर वाली जगहों पर से एक-दूसरे के संक्रमित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है। आईफ्लू होने पर आंखों को बिल्कुल नहीं छूना चाहिए। आंख छूने के बाद आप जब किसी दूसरी सतह को छूते है तो वह संक्रमण के फैलने का सोर्स बनता है। ऐसे में रुमाल और तौलिया का इस्तेमाल किसी और को न करने दें। आईफ्लू का दृष्टि पर प्रभाव नहीं पड़ता है। पांच-सात दिन आई फ्लू ठीक हो जाता है। आई फ्लू होने पर आंखों की ठंडी सेंकाई की जा सकती है। बिना किसी डॉक्टर के परामर्श के कोई भी दवा आंखों में न डालें।
उन्होंने बताया कि इस मौसम में एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस भी बच्चों और युवाओं में अधिक होता है। हालांकि उम्र के बढ़ने पर यह समस्या दूर हो जाती है। एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस की वजह पोलन, धूल, प्रदूषण और मौसम में नमी होना है। मार्च से अप्रैल और जुलाई से सितंबर के बीच एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस अधिक होता है।
डॉ. श्रीदेवी नायर ने कहा कि अगर किसी को एलर्जी की शिकायत होती है तो उसे यह होने की संभावना अधिक रहती है। एलर्जी संबंधी दिक्कत होने पर आंखों को बिल्कुल नहीं रगड़ना चाहिए। इस कार्यक्रम में एम्स निदेशक प्रो. एम श्रीनिवास, आरपी सेंटर प्रमुख प्रो. राधिका टंडन सहित कई दूसरे डॉक्टर मौजूद रहे।