-मुस्तफाबाद में जलस्रोत की जमीन पर अतिक्रमण का मामला, 11 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली में पुराने जलस्रोतों को बचाने के दावों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद गांव में 28 बीघा से ज्यादा जमीन पर बने जोहड़ पर कब्जे का आरोप लगा है। मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने मामले को दिल्ली के जलस्रोतों के संरक्षण से जुड़े पहले से लंबित मामले के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अर्जी के मुताबिक, मुस्तफाबाद गांव के खसरा नंबर 368/1 में 28 बीघा दो बिस्वा क्षेत्र में जोहड़ दर्ज है। याचिका दायर करने वाली संस्था सेव इंडिया फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि इस जलस्रोत की जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। इसके समर्थन में तस्वीरें भी पेश की गई हैं। हालांकि, अतिक्रमण के आरोपों की अभी न्यायाधिकरण में पुष्टि नहीं हुई है।
डीडीए की सूची में भी दर्ज है जोहड़ : याचिकाकर्ता ने अधिकरण को बताया कि संयुक्त निरीक्षण के बाद जलस्रोत की जमीन डीडीए को सौंपी गई थी। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जलस्रोतों की डीडीए की सूची में भी यह जोहड़ 27वें नंबर पर दर्ज होने का दावा किया है। इसके बावजूद जमीन पर कब्जे की शिकायत की गई है। मामले में 15 मई 2025 को सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब का भी हवाला दिया गया। यह जवाब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खंड विकास अधिकारी के कार्यालय की ओर से दिया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, इसमें कहा गया था कि इस जमीन को कब्रिस्तान के लिए आवंटित नहीं किया गया है। जवाब में मुस्तफाबाद को शहरीकृत गांव भी बताया गया था।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप : याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस संबंध में विभिन्न विभागों और अधिकारियों से शिकायतें की गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकरण ने मामले को पर्यावरणीय नियमों के पालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने स्पष्ट रूप से अतिक्रमण की पुष्टि नहीं की है। अब संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ेगी। दिल्ली के जलस्रोतों के संरक्षण से जुड़े मुख्य मामले के साथ इसकी अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी।