भवन निर्माण के नियमों को ताक पर रखकर नोएडा के सेक्टर 93 ए में बनीं 38 मंजिलों की दो इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा। हाईकोर्ट ने ‘अपेक्स’ और ‘सियान’ नाम के दोनों टावरों को चार माह के भीतर ध्वस्त करने का निर्देश दिया है।
इन इमारतों की ऊंचाई 121 मीटर है। ध्वस्त कराने का खर्च निर्माण कंपनी सुपरटेक से वसूला जाएगा। हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार कंपनी और नोएडा के अफसरों पर मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने दोनों रिहायशी इमारतों में फ्लैट खरीदने वालों को पूरी रकम 14 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से चार माह के भीतर लौटाने को कहा है।
कोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं दोनों टॉवर
नोएडा सेक्टर 93 ए स्थित एक इमारत पर कई दिनों से मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित था, जिस पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को इसे गिराने का निर्देश दे दिया गया।
हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण के चलते इस बिल्डिंग को गिराने का आदेश दिया है।
बता दें कि कोर्ट ने जिन टॉवरों को गिराने का आदेश दिया है वे सुपरटेक ग्रुप के इमेराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं।
'नजीर बनेगा यह केस'
याचिकाकर्ता के वकील अमित सक्सेना ने कहा कि कोर्ट का आदेश आने के बाद उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केस भविष्य में नजीर के तौर पर पेश किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि बिल्डिंग के निर्माण से पहले ही खरीदारों को वहां निर्माण के लिए नियम व शर्तें बता दी गई थीं लेकिन बाद में उन्होंने गलत ढंग से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जिससे वह एरिया काफी संकरा हो गया।
सक्सेना ने कहा कि जिन टॉवरों को गिराने का आदेश दिया गया है वहां जो लोग पहले से ही रहने लगे हैं या जो भी हिस्सा बेचा जा चुका है, उनके पैसे रियल्टी सुपरटेक को चुकाने पड़ेंगे।
नोएडा एक्सटेंशन का भी है हाल बुरा
कोर्ट की ओर से नोएडा एक्सटेंशन को लेकर दो साल पहले ऐसा ही फैसला आया था। नोएडा एक्सटेंशन के कुछ गांवों के किसानों ने नोएडा अथॉरिटी के जमीन अधिग्रहण के खिलाफ कोर्ट चले गए थे।
जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यहां हो रहे काम पर रोक लगा दी थी। उसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कुछ गांवों के सुप्रीम कोर्ट ने काम पर रोक लगवा दी। बाकी जगहों पर मुआवजा बढ़ाने का निर्देश दिया। नोएडा एक्सटेंशन के उन क्षेत्रों में आज भी लोग घर को लेकर तरस रहे हैं।