असम से गिरफ्तार किए गए आतंकी निजी कारणों से दहशतगर्दी की राह पर चले थे। निजी परेशानियों का बदला लेने के लिए बांग्लादेशी आईएसआईएस से प्रभावित होकर आतंकी बन गए।
आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ये असम में बम धमाका कर दिल्ली में आकर छिपते और फिर यहां भीड़भाड़ वाली जगहों पर बम विस्फोट करना चाहते थे। आरोपी 13 जुलाई, 2018 में उज्जैन में हुए ट्रेन धमाकों की तरह दिल्ली व असम में वारदात अंजाम देना चाहते थे। ट्रेने धमाकों के लिए जिस तरह के विस्फोटक व बमों का इस्तेमाल किया गया था, ठीक उसी तरह के बम इन आतंकियों ने बनाए थे।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लुइत जमील जमां उर्फ अली असम में दूसरे समुदाय की लड़की से प्रेम करता था। स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया जमील व लड़की की वीडियो फेसबुक पर डाल दी। इस पर लिख दिया कि वह लव जेहाद कर रहा है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो जमील की बेइज्जती महसूस हुई। उसे लगा कि वह बदनाम हो गया है। इसका बदला लेने के लिए वह आईएसआईएस से प्रभावित होकर आतंकी बन गया। रंजीत इस्लाम इस आतंकी मोड्यूल का सरगना है। उसे लगता था कि एक समुदाय के लोग उसे प्रताड़ित कर रहे हैं।
इसका बदला लेने के लिए वह बम धमाके करना चाहता था। मुकादिर इस्लाम इन दोनों का दोस्त है। वह बेरोजगार था और इसी से पेरशान होकर आतंक की राह पर चल पड़ा। रंजीत इस्लाम व जुइत जमील ने उसे आतंकी बनने के लिए उकसाया था। स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारी ने बताया कि अभी तक की पूछताछ में ये सामने आया है कि गिरफ्तार आतंकियों का कोई हैंडलर या आका नहीं है। आरोपी सोशल मीडिया पर आईएसआईएस आकाओं के वीडियो देखकर खुद ही आईएसआईएस से प्रभावित होकर आतंकी बने थे।