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MCD By-Election: उप-चुनाव से पहले तीनों दल बेचैन, जीत के लिए अंतिम समय तक लगाया जोर; पढ़ें किसकी कैसी रणनीति

Sat, 29 Nov 2025 06:01 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तीनों दलों के उम्मीदवार शनिवार को उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर गए जो चुनावी दौड़ में सक्रिय नहीं थे। हालांकि, कई स्थानों पर ऐसा प्रयास उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुआ। बावजूद इसके दलों ने उम्मीद जताई कि रविवार को मतदान शुरू होने के बाद परंपरागत वोट बैंक अपना निर्णय बदल सकता है।
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एमसीडी उप-चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के 12 वार्डों के उपचुनाव का प्रचार शुक्रवार शाम औपचारिक रूप से थम गया, लेकिन चुनावी सरगर्मी शनिवार को भी थमी नहीं। मतदान शुरू होने से कुछ घंटे पहले तक भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता और उम्मीदवार पूरी ताकत के साथ मैदान में डटे रहे। प्रचार बंद होने के नियमों का पालन करते हुए भी दलों ने डोर-टू-डोर कार्यकर्ताओं की मीटिंग, बूथवार समीकरण और रूठे नेताओं को मनाने जैसे प्रयासों के जरिए मतदाताओं पर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश की।

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असमंजस, उम्मीद और बेचैनी
तीनों दलों के दफ्तरों में शनिवार को पूरे दिन असमंजस, उम्मीद और बेचैनी का मिला-जुला माहौल रहा। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने जहां जीत का भरोसा जताया, वहीं कांग्रेस ने मुकाबले वाले वार्डों पर विशेष चर्चा कर संभावित प्रदर्शन का अनुमान लगाया। सभी दलों ने अपने-अपने स्तर पर ग्राउंड रिपोर्ट इकट्ठा की, ताकि रविवार सुबह मतदान शुरू होने से पहले आखिरी रणनीति तय की जा सके।

भाजपा : जीत को लेकर आश्वस्त, बूथ प्रबंधन पर फोकस
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सुबह से ही पार्टी कार्यालय में उम्मीदवारों और बूथ प्रभारी टीमों के संपर्क में रहे। अधिकांश उम्मीदवारों और पदाधिकारियों ने उनको बताया कि माहौल भाजपा के पक्ष में है और पार्टी आराम से जीत रही है। पार्टी की रणनीति मतदान से ठीक पहले रूठे कार्यकर्ताओं को साधने और बूथ स्तर पर वोटर टर्नआउट बढ़ाने पर केंद्रित रही।

आम आदमी पार्टी: माइक्रो मैनेजमेंट, ग्राउंड नेटवर्क की समीक्षा
आम आदमी पार्टी ने शनिवार को पूरे दिन अपने चुनाव प्रबंधन तंत्र की समीक्षा की। वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों और वार्ड प्रभारी टीमों से हार-जीत आकलन जुटाया। साथ ही निगरानी करने वाले स्थानीय समूहों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों से भी प्रतिक्रिया ली। पार्टी ने हर वार्ड में हारने और जीतने के संभावित कारणों की एक सूची तैयार की, जिसे रविवार सुबह बूथ स्तर पर एक्शन प्लान में बदलने का निर्देश दिया गया।

कांग्रेस: सूची बनाई, माहौल टटोला, उम्मीदें सीमित
कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बैठक करके पार्टी के प्रदर्शन का आकलन किया। नेताओं ने उन वार्डों की सूची तैयार की जहां पार्टी को संभावनाएं दिख रही हैं और जिनमें मुकाबला कड़ा है। हालांकि, बातचीत के बाद यह साफ हुआ कि कांग्रेस को उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन की सूचना तो नहीं मिली, लेकिन स्थानीय समीकरणों के आधार पर कुछ वार्डों में कांटे की टक्कर मिल सकती है।
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रूठों को मनाने में नहीं मिली खास सफलता
तीनों दलों के उम्मीदवार शनिवार को उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर गए जो चुनावी दौड़ में सक्रिय नहीं थे। हालांकि, कई स्थानों पर ऐसा प्रयास उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुआ। बावजूद इसके दलों ने उम्मीद जताई कि रविवार को मतदान शुरू होने के बाद परंपरागत वोट बैंक अपना निर्णय बदल सकता है।
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