बढ़ती आगजनी की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार अब झुलसे मरीजों को तत्काल उपचार देने के लिए कवायद कर रही है। इसी क्रम में सरकार ने नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में बर्न मरीजों के लिए राष्ट्रीय चोट सर्विलांस सेंटर (एनआईएससी) शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत आग से जलने वाले लोगों की रजिस्ट्री की जाएगी। हालांकि रजिस्ट्री का काम नए साल तक शुरू करने की बात कही जा रही है क्योंकि सेंटर स्थापित होने के बाद डाटा ऑपरेटर्स और डॉक्टरों की ट्रेनिंग चल रही है कि किस तरह से मरीजों की रजिस्ट्री करनी है।
साथ ही स्टाफ की नियुक्ति भी होगी। भर्ती के बाद प्रोग्रामर्स कर्मचारियों का काम होगा कि वह बर्न मरीजों की रजिस्ट्री को ऑनलाइन कई प्लैटफॉर्म पर अपलोड करें ताकि एक क्लिक में उनकी जानकारी मिल सके। फिलहाल यह सेंटर डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज के अंतर्गत खोला गया है। इस बारे में एनआईएससी के इंचार्ज डॉ. मनोज झा बताया कि बर्न मरीजों की रजिस्ट्री में पूरा डाटा होगा। वह कहां रहता है, आयु, आय, व्यवसाय, परिवार के सदस्यों की संख्या, आग किस कारण से लगी, पहले भी कभी ऐसी घटना घटी है या नहीं सहित कई अन्य चीजें शामिल होंगी। उनका कहना है कि इसका मकसद है कि आग लगने के कारणों पर रिसर्च की जा सके कि किन कारणों से सबसे ज्यादा आग लग रही है ताकि उसे नियंत्रण करने में मदद मिल सके। बहुत कम देशों में बर्न मरीजों की रजिस्ट्री की सुविधा है।
तैयार है सॉफ्टवेयर, ट्रेनिंग पूरी होने का इंतजार
डॉ. झा का कहना है कि इसे लेकर सॉफ्टवेयर भी तैयार कर लिया गया है। जिसमें मरीजों की रजिस्ट्री रखी जाएगी, लेकिन अभी डॉटा ऑपरेटर्स और डॉक्टर्स की ट्रेनिंग पूरी न होने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका है। नए साल तक ट्रेनिंग पूरी होने की उम्मीद है और उसके बाद ही रजिस्ट्री की सुविधा को शुरू कर दिया जाएगा।
पूरे देश का डाटा होगा
देश के किसी भी क्षेत्र में यदि आग लगती है और घायल मरीज अस्पताल पहुंचता है तो उसकी जानकारी भी आरएमएल के सेंटर में मौजूद होगी। सभी अस्पताल सॉफ्टवेयर पर मरीज का डाटा अपलोड कर देंगे और वह सीधा हमारे पास पहुंच जाएगा। आग के छोटे से छोटे केस की जानकारी हमारे पास उपलब्ध होगी।