हाईकोर्ट ने शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) के पुनर्गठन पर जेएनयू प्रशासन से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने 30 जुलाई को गठन से लेकर अब तक के सभी आदेशों, सिफारिशों और निर्देशों को अमान्य घोषित कर दिया है। जेएनयू के कई छात्रों की तरफ से जीआरसी के गठन को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने जेएनयू प्रशासन और जीआरसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी। पेश याचिका में कहा गया है कि लिंग्दोह समिति की सिफारिशों के तहत जीआरसी को एक वरिष्ठ शिक्षक और अंतिम वर्ष के दो छात्रों को सदस्य के तौर पर लेकर गठित किया जाना था। इसरा पालन नहीं किया गया।
जेएनयू की छात्रा प्रियंका बलवंत काले, अमृता जयादीप, एन साईं बालाजी, सारिका चौधरी और एजाज अहमद राथर ने याचिका में यह दावा किया है।