मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में अनोखा प्रदर्शन, जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने रोका, कई कार्यकर्ता हिरासत में
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता सफेद कपड़ा ओढ़कर जमीन पर लेट गए और खुद को प्रतीकात्मक रूप से शव के तौर पर पेश किया।
एनएसयूआई कार्यकर्ता संगठन के मुख्यालय से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने वाले थे। हालांकि, निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से प्रदर्शन शुरू हुआ। कार्यकर्ताओं ने जैसे ही मार्च शुरू किया, पुलिस ने रास्ते में द्विस्तरीय बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकते हुए धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का हवाला दिया और वहीं रुकने को कहा।प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक जाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी शामिल थे।
आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग के पास ही लेटकर सफेद कपड़े ओढ़ लिए। आसपास खड़े कार्यकर्ता नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे जिंदा हैं, लेकिन मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर चुनावी रिकॉर्ड में उनकी पहचान और मतदान का अधिकार खत्म हो जाता है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्क पहनकर भी पहुंचा। उसके साथ मौजूद कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर प्रतीकात्मक प्रस्तुति दी। इस दौरान वोट चोरी के खिलाफ नारेबाजी की गई। एनएसयूआई ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
जाखड़ ने उठाए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ वोटर लिस्ट का मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों के मतदान के अधिकार से जुड़ा विषय है। जाखड़ ने प्रदर्शनकारियों को रोके जाने को लेकर पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोक सकती है, लेकिन उनकी आवाज को नहीं रोक सकती। एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर उसका अभियान आगे भी जारी रहेगा।