पेंट फैक्टरी में आग लगने के बाद समय से दमकल विभाग को सूचना मिल जाती तो कुछ लोगों की जान बच सकती थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि फैक्टरी में शाम 5:25 बजे नहीं, बल्कि चार बजे आग लगी थी, लेकिन फैक्टरी के कर्मचारियों व लोगों ने अपने स्तर पर ही आग बुझाने की कोशिश की और करीब डेढ़ घंटे तक दमकल विभाग को जानकारी नहीं दी। इससे आग ने भयावह रूप ले लिया। वहीं, दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में फैक्टरी होने से सूचना मिलने के बाद भी गाड़ियों को पहुंचने में देर हुई।
घटनास्थल से दो गली दूर रहने वाले चश्मदीद सुमित भारद्वाज ने बताया कि पहले जोरदार धमाका हुआ था। सुमित कुछ साथियों के साथ फैक्टरी के पास पहुंचे तो आग लगी हुई थी। फैक्टरी के कर्मचारी अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे। उन लोगों ने भी बाल्टी में पानी लेकर आग बुझाने की कोशिश की। आग करीब चार बजे के आसपास लगी थी। किसी ने दमकल विभाग को सूचना नहीं दी। काफी प्रयास के बावजूद केमिकल में लगी आग भड़क गई। केमिकल के ड्रम कई धमाकों के बाद आग के गोलों में बदल गए। लोगोें ने फैक्टरी के पीछे जाकर फैक्टरी में फंसे छह लोगों को बाहर निकाला।
इधर, दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि शाम 5:25 बजे आग लगने की जानकारी मिलने के बाद आसपास के दमकल स्टेशनों से चार गाड़ियों को भेजा गया। शाम के व्यस्त समय के कारण सड़कों पर वाहनों का दबाव था। साथ ही, सघन आबादी होने से दमकल की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में देरी हुई। केमिकल ड्रम बीस फीट तक उछलकर आसपास के मकानों पर गिर गए थे जिससे आसपास के मकान और दुकानों में भी आग लग गई।