वायु प्रदूषण से ज्यादा खाने की गलत आदत आंत को नुकसान पहुंचा रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अस्पताल आने वाले अधिकतर मरीजों में फैटी लीवर की समस्या है। यह 10 साल के बच्चे को भी 40 साल के उम्र के जैसा बना सकता है।
विश्व फैटी लिवर दिवस के अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएनबीएस) में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें विशेषज्ञों ने बचाव के लिए विशेष चेतावनी जारी की।
संस्थान के निदेशक डॉ. शिव कुमार सरीन ने कहा कि हम अपने शरीर में जो भी अतिरिक्त कैलोरी डालते हैं, वह वसा बन जाती है। यह लीवर के चारों ओर जमा हो जाती है, जिससे फैटी लीवर की समस्या होती है। यह आगे चलकर सभी अंगों में सूजन पैदा करता है। यह आगे चलकर मधुमेह रोग दे सकता है।
भोजन ही दवा
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि पाठ्यक्रम में भोजन ही दवा है को शामिल किया जाना चाहिए। स्थानीय आहार, पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों, सामूहिक कार्रवाई और एक व्यापक स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
शुरू होगा अभियान
डॉ. विनोद पॉल ने वाई-स्माइल्स (युवा सशक्त भारत एक मिलियन स्वास्थ्य शिक्षित छात्रों के माध्यम से) को शुरू किया। यह आईएलबीएस की एक पहल है। इसका उद्देश्य छात्रों (11-17 वर्ष की आयु) को फैटी लीवर रोग (एफएलडी) के कारण, परिणाम और रोकथाम के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
पाठ्यक्रम में होगा बदलाव
निदेशक ने स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव का सुझाव दिया। नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल ने कहा कि भारत के आर्थिक लाभ एनसीडी से प्रभावित हो सकता है। भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर खर्च बढ़ गया है। भारत में नमक की औसत खपत विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित से अधिक है।
होनी चाहिए जांच
विशेषज्ञों ने 10-19 वर्ष की आयु के बच्चों के बीच प्रीडायबिटीज के लिए एक व्यवस्थित राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा कि सभी मधुमेह रोगियों को मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोसिस लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) के लिए स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। पिछले 30-40 सालों में मोटापे की समस्या देश में बढ़ी है। स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आरपी जोशी ने कहा कि फैटी लीवर की समस्या को गंभीर बना सकता है।