दिल्ली में दो साल बाद स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों का रिकॉर्ड टूट गया है। वर्ष 2024 के बाद सबसे ज्यादा स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष 31 अगस्त तक कुल 3828 स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ चुके है। इसमें दिल्ली के कुल 3218 मामले और बाकी दिल्ली से बाहर के शामिल है।
सोमवार को दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 164 नए मामले दर्ज किए गए। जबकि इंफ्लूएंजा ए और बी को मिलाकर 5349 मामले सामने आ चुके है। इसमें दिल्ली के 4372 मामले शामिल हैं। वर्ष 2024 में दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 3151 मामले सामने आए थे। जबकि वर्ष 2025 में 30 सितंबर तक 229 मामले दर्ज किए गए थे। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में निदेशक प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने बताया कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन ऐसे मरीज जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर, हार्मोनल दिक्कत, अंग ट्रांसप्लांट वाले, गर्भवती महिलाएं और दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझने वाले है उनको सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चे और बुजुर्ग भी अपना ध्यान रखें।
उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस कोई नया नहीं है। वर्ष 2009 में सामने आया था। वायरस में समय-समय पर बदलाव होता है। लेकिन अभी वाला वायरस का वेरिएंट पुराना है। ऐसे में ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है। वायरस के उपचार के लिए एंटी वायरल ड्रग उपलब्ध है। साथ ही वायरस से एक बार संक्रमित होने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। अधिक ठंड लगने, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर जरूर दिखाएं।
यमुनापार के अस्पतालों में बढ़े फ्लू जैसे मरीज, एच1एन1 जांच की किट नहीं
यमुनापार के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन अस्पतालों में एच1एन1 की जांच के लिए टेस्ट किट उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ही बीमारी की पुष्टि कर इलाज कर रहे हैं।
जीटीबी और स्वामी दयानंद जैसे अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक संदिग्ध मरीज ओपीडी पहुंच रहे हैं। टेस्ट किट न होने से बीमारी की पहचान लक्षणों पर निर्भर है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को सामान्य उपचार देकर घर भेजा जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा जाता है। सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मधुमेह, सीओपीडी और अस्थमा जैसी बीमारियों वाले मरीजों पर भी खास नजर रखी जा रही है। ऐसे मरीजों को एंटीवायरल दवा, ऑक्सीजन और अन्य सपोर्टिव उपचार दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने, हाथ साफ रखने और बीमारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
रैपिड किट हो तो 10 मिनट में मिल सकती है रिपोर्ट
डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध होने पर संदिग्ध एच1एन1 मरीजों की जांच तेजी से की जा सकती है, जिसमें करीब 10 से 15 मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है। फिलहाल अस्पतालों में किट उपलब्ध न होने की वजह से यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। जरूरत पड़ने पर मरीज के नमूने को उच्चस्तरीय जांच के लिए भेजने या पीसीआर टेस्ट कराने का विकल्प है, लेकिन इसमें रैपिड टेस्ट की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
गंभीर मरीजों को तुरंत एंटीवायरल
एच1एन1 के संदिग्ध श्रेणी-बी मरीजों को ओसेल्टामिविर दिया जा रहा है। श्रेणी-सी के मरीजों को तुरंत भर्ती कर एंटीवायरल उपचार शुरू किया जाता है। इनमें कम ऑक्सीजन स्तर या पुरानी बीमारियों वाले मरीज शामिल हैं। स्वामी दयानंद अस्पताल की एमएस सुनीता ने बताया कि उन्होंने जांच किट का ऑर्डर दिया है। किट जल्द आने पर जांच शुरू हो जाएगी।