रामपुर में बुधवार को दिन में छाए कोहरे और धुंध से गुजरते वाहन
अगर आप जिले की सड़कों से गुजर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। शहर की सड़कों पर कोहरे ने हादसों का ग्राफ बढ़ाना शुरू कर दिया है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी कोहरे के कहर से निपटने के इंतजाम शून्य हैं। शहर की सड़कों पर जगह-जगह लापरवाही के सबूत देखे जा सकते हैं। जिला पुलिस की रिपोर्ट के आंकड़े भी हैरान कर देने वाले हैं।
साल 2017 में कोहरे ने 83 जिंदगियां छीन ली थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष 1043 सड़क हादसे हुए, जिनमें 419 लोगों को जान गंवानी पड़ी। 191 सड़क हादसे कोहरे व धुंध की वजह से हुए, जिनमें 83 लोगों की मौत हो गई और 79 लोग गंभीर रूप से घायल हुए ओर 44 लोगों को मामूली चोट आई। इसके बाद भी प्राधिकरण ने पुरानी गलतियों से सबक लेने की जरूरत नहीं समझी।
सड़कों पर दिख रहे लापरवाही के सबूत
सड़कों की बदहाली भी ट्रैफिक के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं है। शहर में जगह-जगह लापरवाही के सबूत देखे जा सकते हैं। अमर उजाला टीम ने शहर की सड़कों का जायजा लिया तो हर तरफ लापरवाही ही लापरवाही दिखाई दी।
एमपी-1 मार्ग : शहर की सड़कों पर अतिक्रमण और पार्किंग न केवल यातायात व्यवस्था के लिए मुसीबत बनी हुई है, बल्कि सड़क पर खड़े वाहनों से हादसे भी हो रहे हैं। एमपी-1 मार्ग पर सेक्टर-20 थाने के नजदीक और सेक्टर-12 के पास बस ऑपरेटरों की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। कोहरे या धुंध में इन बसों से वाहन टकराने का खतरा बना हुआ है।
सेक्टर-73 : हर साल प्राधिकरण सड़कों के रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर देता है, लेकिन फिर भी सड़कों की बदहाली दूर नहीं होती। शहर के यू-टर्न, डिवाइडर और फुटपाथ पर कोहरे से निपटने के लिए न रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं और न ही रंग-रोगन किया गया है। कई मार्गों पर तो लेन ड्राइविंग के लिए मार्किंग ही नहीं की जा सकी है। डिवाइडरों पर पोस्टर ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।