इकलाख का परिवार बिसाहड़ा गांव से नाता तोड़कर किसी दूसरी जगह नहीं बसेगा। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बच्चे और महिलाएं हादसे को भुलाने के लिए कुछ दिन के लिए दूसरे स्थान पर जा सकते हैं।
यहां से जाने के सवाल पर उनका कहना है कि इसका फैसला बाद में लिया जाएगा, लेकिन जहां रहेंगे, साथ में रहेंगे। इकलाख के परिजन लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलने के बाद तीन दिन तक अपने घर से दूर रहे।
बुधवार शाम इकलाख की मां असगरी बेगम और बेटी शाहिस्ता घर लौट आईं। शाहिस्ता ने तबीयत खराब होने के चलते मीडिया से दूरी बनाए रखी। एक सप्ताह से परिवार के शिफ्ट होने की अटकलें थीं।
जहां भी रहेंगे, वहां एक साथ रहेंगे
सरताज ने कहा कि वह गांव में नहीं रहेगा जबकि परिवार के अन्य सभी मुखिया लगातार एक ही बात कर रहे हैं कि वह दानिश के ठीक हो जाने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। इकलाख के भाई जमील कहते हैं कि पांच पीढ़ी से बिसाहड़ा रह रहे हैं। दोषियों को सजा मिले पर कोई निर्दोष पर कार्रवाई न हो। गांव के लोग पूरा सहयोग कर रहे हैं।
दर्द भुलाने के लिए कुछ समय दूसरे स्थान पर जा सकते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं की गांव छोड़ देंगे। परिवार के सभी सदस्य गांव में ही हैं। वहीं इकलाख के दूसरे भाई जान मोहम्मद भी कुछ यूं कहते हैं कि गांव छोड़ने के बारे में अभी कुछ नहीं सोचा है।
दानिश के अस्पताल से घर आने के बाद ही पूरा परिवार एक साथ बैठेगा और उसके बाद ही निर्णय लेगा कि कहां रहना है। मगर जहां भी रहेंगे, वहां एक साथ रहेंगे। दर्द को भुलाने के लिए भले ही कुछ दिन गांव से दूर रह सकते हैं।
इकलाख की मां बोली अब हमें और तंग ना करें
इकलाख की मां कहती हैं कि सरकार ने हमारी बहुत मदद की है। आगे क्या करना है, इस पर मेरे बेटे ही फैसला लेंगे। खुद कोई निर्णय लेने में सक्षम नहीं हूं। अभी दानिश के सही होने के लिए दुआ कर रहे हैं। हम बहुत दुखी हैं। अब हमें और तंग न किया जाए।
इकलाख के परिवार ने बृहस्पतिवार को फिर से कहा की कि वे मीडिया के सामने नहीं आना चाहते हैं। जब भी वे उस घटना को बताते हैं, तो वहीं मंजर उनके सामने आ जाता है।
इकलाख की बेटी शाहिस्ता समेत अन्य परिजनों ने मीडिया से तल्ख लहजे में भी घर पर न आने के लिए कहा है। उनका कहना है कि वह इस दर्दनाक घटना की यादें भुलाना चाहते हैं मगर कोई न कोई इस बात को छेड़कर उसी मंजर को याद दिला देता है।