दिल्ली में चौधरी चरण सिंह स्मारक बनाने की मांग को लेकर 18 सितंबर को रेगुलेटर पर दिल्ली का पानी रोकने के दौरान पुलिस और किसानों में टकराव हुआ था। संघर्ष में घायल हुए किसान सूबे सिंह अमराला की मंगलवार रात गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में मौत हो गई।
परिजनों की मानें तो उन्हें टकराव के दौरान छर्रे लगे थे और तभी से उनका इलाज चल रहा था। फेफड़ों में इंफेक्शन होना उनकी मौत का कारण बना। सूचना पर पहुंचे रालोद नेताओं ने मृतक को शहीद का दर्जा और मृतक आश्रितों को मुआवजा देने की प्रदेश सरकार से मांग की है।
बता दें कि दिल्ली में स्वर्गीय चौधरी स्मारक की मांग को लेकर 18 सितंबर को अजित समर्थकों ने मुरादनगर स्थित सोनिया विहार और भगीरथी रेगुलेटर पर दिल्ली का पानी रोका था। इस दौरान अजित समर्थकों एवं पुलिस के बीच जबर्दस्त टकराव हुआ था।
पानी रोकने के दौरान पुलिस और रालोद कार्यकर्ताओं में हुआ था संघर्ष
संघर्ष में बड़ी संख्या में किसान रबड़ की गोली, छर्रे और पुलिस की लाठी लगने से घायल हुए थे। वहीं, एसएसपी समेत 48 पुलिसकर्मियों को भी चोट लगी थी। इस मामले में पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत कई गंभीर धाराओं में 13 नामजद एवं पांच हजार अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की थी।
टकराव के दौरान घायल हुए अमराला गांव निवासी सूबे सिंह (70) भी इस मामले में नामजद थे। उनके बडे़ बेटे प्रमोद कुमार ने बताया कि सूबे सिंह को घायल अवस्था में पहले मोदीनगर के जीवन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर उनका 25 सितंबर से गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में इलाज चल रहा था।
सूबे सिंह के फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया था, जिस कारण मंगलवार रात उनकी मौत हो गई। बुधवार सुबह परिजनों ने गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार कर दिया है। मृतक के बेटे प्रमोद कुमार हापुड़ के सरकारी स्कूल में टीचर है, जबकि दो बेटे राजेंद्र एवं बिजेंद्र दस्तावेज लेखक हैं।
डीएम से मिलकर करेंगे मुआवजे की मांग
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, प्रदेश महासचिव रणवीर दहिया, बिट्टू खंजरपुर, सतेंद्र तोमर ने मृतक के आवास पर पहुंचकर उनके परिजनों को सांत्वना दी। बकौल त्रिलोक त्यागी डीएम से मिलकर मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाया जाएगा। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने मामले में प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।