क्रिकेटर अजीत चंदीला पर आजीवन प्रतिबंधन लगाने से अजीत के परिवारीजन गुस्से में हैं। अजीत के भाई वीरपाल चंदीला का कहना है कि अजीत निर्दोष है और बीसीसीआई ने न्यायपालिका का अपमान किया है।
जब न्यायपालिका ने दिल्ली पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट पर अजीत को बरी कर दिया, तो बीसीसीआई ने न्यायपालिका के फैसले के खिलाफ निर्णय कैसे लिया। वीरपाल ने कहा कि परिवार को विश्वास था कि न्यायपालिका से बरी होने के बाद बीसीसीआई भी अजीत के पक्ष में फैसला लेगी। बीसीसीआई को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और अजीत को खेलने का मौका देना चाहिए।
वह इस निर्णय के खिलाफ मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री तक गुहार लगाएंगे। उन्होंने बताया कि अजीत बीसीसीआई के निर्णय से बहुत निराश है। अजीत को पूरा विश्वास था कि बीसीसीआई उसके पक्ष में फैसला लेगी।
इसी विश्वास के साथ उसने फिर से क्रिकेट का अभ्यास शुरू किया था। 2013 से परिवार के हर सदस्य की आंखें बीसीसीआई के फैसले पर टिकी हुई थीं। बीसीसीआई ने परिजनों की उम्मीद तोड़ दी है। अजीत निर्दोष है। बीसीसीआई को उसे खेलने का मौका देना चाहिए।