आप नेता संजय सिंह प्रेस वार्ता करते हुए
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन के बिजली की कीमतों के मामले में उठाए गए सवाल पर आम आदमी पार्टी (आप) ने तीखा हमला बोला है। अजय माकन को कांग्रेस के अंदर भाजपा का प्रवक्ता करार देते हुए पार्टी ने सवाल उठाया है कि दिल्ली सरकार में ऊर्जा मंत्री रहते हुए माकन ने दिल्ली में बिजली का निजीकरण क्यों किया? वहीं, दिल्ली में उन्होंने सबसे महंगी बिजली खरीदने की इजाजत क्यों दी थी? पार्टी ने अजय माकन के सभी आरोपों को निराधार बताया है।
पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि आज दिल्ली में सबसे सस्ते दाम में 24 घंटे बिजली मिल रही है। जबकि कांग्रेस नेता अजय माकन कह रहे हैं कि दिल्ली में 8.45 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिल रही है। संजय सिंह ने बताया कि माकन इसके बावजूद यह बातें कह रहे हैं कि दिल्ली में 200 युनिट तक बिजली मुफ्त है। साथ ही जिस तरह से वह गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक के बिजली के दामों को सही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, उससे साबित होता है कि वह कांग्रेस के अंदर भाजपा के प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे हैं। संजय सिंह ने इस मौके पर देश के अलग-अलग राज्यों की बिजली दरों की तुलना दिल्ली से की।
संजय सिंह ने बताया कि दिल्ली में बिजली का निजीकरण माकन के ऊर्जा मंत्री रहते हुआ था। वहीं, 2010 से 2013 के बीच बिजली के दाम 100 फीसदी बढ़ गए थे, जबकि बीते पांच सालों में 100 फीसदी तक घटे हैं। संजय सिंह ने सवाल किया कि माकन को बताना चाहिए कि कांग्रेस के समय 200 यूनिट के दाम 988 रुपये कैसे हो गए थे। जबकि आज उसे शून्य करके अरविंद केजरीवाल ने आम दिल्लीवालों का हित किया या अहित? उनको इसकी सच्चाई जनता के सामने रखना चाहिए।
संजय सिंह ने बताया कि 400 यूनिट तक बिजली के दाम 2010 में 1,368 व 2013 में 2,243 रुपये हो गये थे। जबकि इस वक्त 400 यूनिट तक के बिजली के दाम 1,175 रुपये हैं। वहीं, बिजली की आपूर्ति भी 24 घंटे है। संजय सिंह ने सवाल किया कि माकन को बताना चाहिए कि दिल्ली में बिजली के निजीकरण के पीछे क्या-क्या घटनाक्रम हुआ था? इसके पीछे कौन सा खेल खेला गया? किस कारण से बिजली कंपनियों से महंगी बिजली लेने का समझौता किया था? संजय सिंह ने कहा कि इन सवालों के जवाब इसलिए भी जरूरी है कि इससे दिल्लीवालों को महंगी बिजली खरीदनी पड़ी।
संजय सिंह ने बताया कि कांग्रेस शासन में किए गए पावर परचेज समझौते (पीपीए) से बवाना फेज-तीन प्रोजेक्ट से अभी 6.98 रुपये प्रति यूनिट, प्रगति फेज-एक प्रोजेक्ट से 5.41 रुपये प्रति यूनिट व ऊंचाहार प्रोजेक्ट तीन से 4.46 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिल रही है। समझौता जारी रखना इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि इसी अवधि 30-30 साल तक की है। वहीं, मौजूदा आप सरकार के पीपीए से 2.60 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिल रही है। संजय सिंह ने कहा कि माकन को दिल्ली सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने गिरबां में झांकना चाहिए।