-वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) के नेटवर्क के विस्तार की समीक्षा की
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क को बड़े स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) के नेटवर्क के विस्तार की समीक्षा की है। इस पहल का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में रियल-टाइम वायु गुणवत्ता की सटीक और भरोसेमंद निगरानी सुनिश्चित करना है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस और वैज्ञानिक आधार पर फैसले लिए जा सकें। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में कुल 84 मॉनिटरिंग स्टेशन संचालित हैं। इनमें दिल्ली में 40, हरियाणा में 22, राजस्थान में 4 और उत्तर प्रदेश में 18 स्टेशन शामिल हैं। अब इस नेटवर्क में 27 नए सीएएक्यूएमएस जोड़े जा रहे हैं। इनमें दिल्ली में 6 स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि हरियाणा में 7, राजस्थान में 4 और उत्तर प्रदेश में 10 स्टेशन लगाए जा रहे हैं।
सीएक्यूएम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव, औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए मॉनिटरिंग नेटवर्क को और घना बनाना जरूरी है। इसी के तहत बड़े शहरों जैसे दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और सोनीपत में हर 25 वर्ग किलोमीटर (5x5 किमी ग्रिड) पर एक मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने का मानक तय किया गया है। अन्य जिला मुख्यालयों और शहरों में हर 50 वर्ग किलोमीटर में एक स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, क्षेत्रीय प्रदूषण के आवागमन और पृष्ठभूमि वायु गुणवत्ता को समझने के लिए बॉर्डर और बैकग्राउंड स्टेशनों की भी जरूरत बताई गई है। वैज्ञानिक मानकों के आधार पर भविष्य में 46 और नए स्टेशनों की आवश्यकता आंकी गई है। इनमें दिल्ली में 14, हरियाणा में 16, राजस्थान में 1 और उत्तर प्रदेश में 15 स्टेशन शामिल होंगे।
इन सभी स्टेशनों के स्थापित होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में सीएएक्यूएमएस की कुल संख्या बढ़कर 157 हो जाएगी। इसमें दिल्ली में 60, हरियाणा में 45, राजस्थान में 9 और उत्तर प्रदेश में 43 स्टेशन शामिल होंगे। अधिकारियों का कहना है कि एक मजबूत और घना मॉनिटरिंग नेटवर्क प्रदूषण के स्रोतों की सही पहचान, ट्रेंड की निगरानी और समय पर जरूरी कदम उठाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।