एक्यूआईसीएन के मुताबिक सुबह आठ बजे मुंडका में 582, बवाना में 578, पंजाबी बाग में 510 एक्यूआई दर्ज किया गया। वहीं, जहांगीरपुरी में 422, आनंद विहार में 534, वजीरपुर में 448, नरेला में 372, आरकेपुरम में 395 एक्यूआई दर्ज किया गया है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि यह स्थिति पूरे उत्तर भारत में बनी हुई है। दिल्ली के अलावा, हरियाणा के 12 जिलों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में है। राजस्थान में ऐसे 14 स्थान हैं। पश्चिम में कई जिले हैं। उत्तर प्रदेश जहां ऐसी ही स्थिति है। दिल्ली में हमने ग्रैप नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए कल एक विशेष टीम का गठन किया। मुझे लगता है कि यह पूरे उत्तर भारत के लिए एक समस्या है। केवल दिल्ली से इसका समाधान नहीं हो सकता। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे। मैं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से पर्यावरण मंत्रियों की एक बैठक आयोजित करने का भी अनुरोध करता हूं।
मौसमी बदलाव व हवा की दिशा बदलने के चलते दिल्ली का एक्यूआई समग्र रूप से गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। कमोबेश यही स्थिति रविवार तक बने रहने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी हवा के कारण प्रदूषित कण वातावरण में फैल नहीं पा रहे, जिस कारण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक गुरुवार को हवा उत्तर-पूर्व व दक्षिण पूर्वी दिशा की ओर से चली। इस दौरान हवा की गति छह किलोमीटर प्रतिघंटे से रही। हवा की गति कम होने से प्रदूषण बढ़ रहा है। शुक्रवार को हवा उत्तर-पूर्व दिशा से चलने का अनुमान है। इस दौरान हवा की गति चार किलोमीटर प्रतिघंटे से चलेगी। जबकि सुबह के समय धुंध छाए रहने का अनुमान है।
शनिवार को हवा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर से चलेगी। हवा की चाल चार किलोमीटर प्रतिघंटे रहने का अनुमान है। रविवार को दक्षिण-पूर्व व पूर्व की दिशा की ओर से हवा चलेगी। मिक्सिंग हाइट 1500 मीटर दर्ज की गई। सफर इंडिया के अनुसार दिल्ली में गुरुवार शाम पांच बजे हवा में प्रदूषक कण पीएम 10 का स्तर 380 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का स्तर 254 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर पर रहा।
उधर, चार दिवसीय छठ पर्व शुरू होने से पहले यमुना ने सफेदी की चादर ओढ़ ली है। दूर-दूर फैली झाग की मोटी चादर छठ व्रतियों के सब्र का इम्तिहान सी लेती नजर आ रही है। ओखला बैराज के बाद नदी का पानी भी दिखना मुश्किल है। उधर, बीते सालों की तरह यमुना की झाग ने दिल्ली की सियासी तपिश भी बढ़ाई है। दिल्ली सरकार व भाजपा ने एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा किया है।