राजधानी दिल्ली में हवा में प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। धीमी रफ्तार और कम तापमान को प्रदूषण के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार माना जा रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर दिल्ली-एनसीआर के शहरों में प्रदूषण का सर्वाधिक स्तर गाजियाबाद (441) पर रहा। नोएडा का सूचकांक 433 जबकि फरीदाबाद में यह आकंड़ा 427 रहा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य तीन शहरों से दिल्ली का सूचकांक कम स्तर पर रिकॉर्ड किया गया, बावजूद इसके प्रदूषण अभी भी गंभीर स्तर पर बरकरार है।
एजेंसियों के मुताबिक रविवार को दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 404 के स्तर पर रहा। वहीं ग्रेटर नोएडा में यह 383 और गुरुग्राम में सूचकांक 284 के स्तर पर रहा जो एनसीआर के अन्य शहरों से कम है। जानकारों के मुताबिक हवा की रफ्तार में तेजी होने से प्रदूषण फैलाने वाले कण इधर-उधर बिखर जाएंगे। जिससे प्रदूषण के स्तर में कमी आ सकती है। हवा में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कणों सहित अन्य कारणों के लिए तय मानकों के आधार पर वायु गुणवत्ता सूचकांक का निर्धारण किया जाता है।
पीएम 2.5 आपातकालीन स्तर पर
संस्था सफर के मुताबिक राजधानी में हवा में पीएम (2.5) 300.5 रिकॉर्ड किया गया, जिसे आपातकाल की श्रेणी में रखा गया है। इस दौरान पीएम (10) 470 के स्तर पर रहा। जो आपातकाल की श्रेणी से कुछ ही कम है।