गाजियाबाद की आबोहवा लगातार दूसरे दिन भी रेड जोन में रही। हवा की गति बढ़ने से पीएम 2.5 में थोड़ा सुधार हुआ है, जबकि पीएम 10 में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। प्रदूषण के बढ़ रहे स्तर को कम करने के लिए प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। अधिकारिक सूत्रों की मानें तो यदि जल्द ही सुधार नहीं हुआ तो कंस्ट्रक्शन साइट और वायु प्रदूषण फैला रहे उद्योगों को कुछ दिन के लिए बंद करा दिया जाएगा।
दिल्ली-एनसीआर पिछलों 15 दिनों से वायु प्रदूषण की चपेट में है। एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 300 से ऊपर चल रहा है। बृहस्पतिवार को भी सबसे अधिक कानपुर का एक्यूआई 388 रहा। दिल्ली एनसीआर में दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद रेड जोन में रहे। इन जिलों की आबोहवा वेरी पूअर (रेड जोन) में है। खास बात यह है कि हवा में महीन कणों का स्तर पीएम 2.5 तेजी से बढ़ रहा है।
एक नजर सीपीसीबी के राष्ट्रीय एयर क्वालिटी इंडेक्स पर
गुरुगाम 362
फरीदाबाद 358
दिल्ली 328
गाजियाबाद 321
नोएडा 316
गाजियाबाद में पीएम 10 और पीएम 2.5 की स्थिति
पीएम 10 306 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (एवरेज)
पीएम 2.5 323 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (एवरेज)
प्रदूषण के बिगड़ते स्तर पर अंकुश लगाने के लिए दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने सख्त रुख अख्तियार किया है। प्रतिबंध के बावजूद इलाके में कचरे और पत्ते जलाने वाले व्यक्ति का चालान काटा जाएगा। इसके लिए दक्षिणी निगम ने सभी जोन में टीमें गठित की है। यह टीम रात के वक्त गश्त करेगी। इतना नहीं सर्दियों के दौरान लकड़ी जलाकर हाथ सेंकने वाले लोगों के खिलाफ भी निगम कार्रवाई करेगा।
राजधानी में बढ़ते प्रदूषण की वजह से बच्चों, बुजुर्गों सहित दिल्ली वासियों की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। इस दिशा में पहल करते हुए दक्षिणी निगम ने पत्ते और कचरा जलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए रात के समय गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) का निर्णय लिया है। सफाई निरीक्षकों के नेतृत्व में छह कर्मचारियों की पांच-पांच टीमें हर जोन में गठित की गई हैं।
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कचरा और पत्ते जलाने से निकलने वाले धुएं और इससे पैदा हुई राख से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। इससे लोगों को सांस लेने में भी कठिनाई होती है। नाइट पेट्रोलिंग से प्रदूषण के स्तर में काफी हद तक नियंत्रण संभव होगा।