एयर लाइन कंपनी एयर एशिया को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने में किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने यह जवाब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर दिया है। स्वामी ने याचिका दायर कर कहा था कि केंद्र सरकार को विदेशी उड़ान लाइसेंस संबंधी आवेदन पर विचार न करने का निर्देश दिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने हलफनामा पेश कर कहा कि एफडीआई की अनुमति प्रदान करने में सभी नियमों का पालन किया गया है। नई व पुरानी दोनों तरह की विमानन कंपनियों में एफडीआई की अनुमति दी जा सकती है।
एयर एशिया को विदेशी उड़ानों का लाइसेंस देने पर विचार कर सरकार निर्णय लेगी। भाजपा नेता स्वामी ने याचिका दायर कर कहा था कि एयर एशिया को एफडीआई की अनुमति देने में नियमों का उल्लंघन हुआ है। याचिका पर खंडपीठ ने सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख तय की है।
याची का आरोप है कि सीबीआई के अलावा ईडी ने भी एयर एशिया के कुछ अधिकारियों के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज किया है। इसलिए केंद्र सरकार को एयर एशिया के आवेदन पर फिलहाल विचार नहीं करने का निर्देश दिया जाए।
पेश याचिका में कहा गया कि फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने एयर एशिया इंडिया और विस्तारा को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की अनुमति देने के खिलाफ याचिका दायर कर रखी है। स्वामी ने अपनी याचिका में कहा कि फेडरेशन ने मार्च और जुलाई 2018 में इसकी शिकायत करते हुए सीबीआई को पत्र लिखा था।