अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अब रेफरल मरीजों के भी शरीर में टॉक्सिन का पता लगाएगा। देश के किसी भी अस्पताल से मरीज एम्स आकर अपने यूरिन या ब्लड सैंपल के जरिये इन घातक रसायनों के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है।
इसका एक फायदा संबंधित मरीज के इलाज में मदद मिलने में होगा। दूसरा एम्स को पता चलेगा कि देश में किस स्तर पर प्रदूषण लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। फिर चाहे वह भोजन से जुड़ा हो, पीने के पानी या फिर वायु प्रदूषण। इस तरह की सुविधा और रिसर्च अब तक देश में कभी नहीं हुई।
हाल ही में शुरू हुई इकोटॉक्सिलॉजी प्रयोगशाला के तहत एम्स अपने यहां आने वाले मरीजों के ब्लड व यूरिन सैंपल के जरिये घातक रसायनों के बारे में पता लगा रहा है। अब एम्स इस सुविधा को सभी अस्पतालों के लिए भी देना चाहता है। अगले दो सप्ताह के भीतर इसकी शुरुआत भी हो जाएगी। हालांकि इसके लिए एम्स ने रियायती दरों को तय किया है।
25 से लेकर 1500 रुपये तक के शुल्क में एम्स सरकारी और निजी अस्पतालों के मरीजों को ये सुविधा देगा। इसके लिए संबंधित अस्पताल से रेफरल होना जरूरी है। साथ ही एम्स आने के बाद उन्हें एक फॉर्म भरकर सैंपल के साथ जमा कराना होगा। टॉक्सिन के कम्पोनेंट, एलीमेंट और फ्लूड के अनुसार ही जांच और उसका शुल्क तय होगा।
एम्स के वरिष्ठ डॉ. जावेद बताते हैं कि बीते माह ही देश में पहली बार एम्स में इकोटॉक्सिलॉजी केंद्र को स्थापित किया गया है। मरीजों के शरीर में मौजूद विषाक्तता का पता लगाने के लिए एम्स की ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब किसी भी अस्पताल से रेफरल मरीज इस सुविधा का लाभ ले सकता है।
पॉजिटिव आया तो पानी का सैंपल लेगा
डॉ. जावेद ने बताया कि रेफरल मरीज को जांच कराने पर शुल्क देना होगा, लेकिन अगर सैंपल पॉजिटिव आता है यानी कि मरीज के शरीर में घातक रसायनों की मौजूदगी का पता चलता है तो उसके घर से पानी का सैंपल लेकर निशुल्क जांच की जाएगी। एम्स अपने यहां आने वाले और रेफरल मरीजों के पॉजिटिव मिलने पर खाने और पानी की जांच का पूरा रिकॉर्ड भी तैयार करेगा, ताकि उसे देश भर के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषित पानी और भोजन का सही आंकलन मिल सके।
एम्स के पास होगा पूरा रिकॉर्ड
टॉक्सिन की जांच कराने वाले एम्स और बाहरी अस्पताल सभी मरीजों का पूरा रिकॉर्ड एम्स अपने यहां सुरक्षित रखेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा एम्स के विशेषज्ञों को आने वाले दिनों में शुरू होने वाली रिसर्च में मिलेगा। एम्स जल्द ही ऐसी रिसर्च करने वाला है जिसमें वह बता सके कि देश के किस क्षेत्र में किस तरह के प्रदूषण से लोग घातक रसायनों के शिकार हो रहे हैं।