देशभर के चिकित्सा संस्थानों की आईसीयू में भर्ती एक हजार में हर दसवां मरीज रक्त संबंधित संक्रमण से पीड़ित है। इनमें से कई मरीज सुपर बग की चपेट में आ जाते हैं जिन पर कोई एंटीबायोटिक दवा असर नहीं कर पाती। ऐसे मरीजों को बचा पाना मुश्किल हो जाता है जबकि स्वच्छता सहित कुछ सावधानियों से ऐसे मरीजों को बचाया जा सकता है।
अमेरिका से पीछे, कम आय वाले देश से आगे
आईसीयू में संक्रमण के मामले में देश अमेरिका से काफी पीछे है। अमेरिका के आंकड़ों से मिलान में पाया गया कि यह लगभग तीन गुना ज्यादा है। वहीं कम आय वाले देश के
अध्ययन के मुकाबले भारत के अस्पतालों में होने वाले संक्रमण का आंकड़ा काफी बेहतर है।
उत्तर भारत में ज्यादा मामले
संक्रमण के अध्ययन में पाया गया कि नार्थ इंडिया के संस्थानों में संक्रमण ज्यादा है। जबकि साउथ इंडिया में कम। हालांकि राज्य स्तर पर संक्रमण को लेकर अभी डाटा का अध्ययन किया जा रहा है। इसके अलावा संस्थानों के आधार पर भी अध्ययन किया जाएगा।
तैयार होगी गाइडलाइन
आईसीयू में संक्रमण दर को कम करने के लिए डाटा अध्ययन के बाद गाइडलाइन तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, हालांकि इसे काफी कम किया जा सकता है। इसके लिए मानक तैयार किए जाएंगे। साथ ही नीति बनाकर सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
पांच साल में घटा संक्रमण
पांच साल में संक्रमण का दर काफी कम हुआ है। पांच साल पहले जब इस जब संक्रमण की जांच शुरू हुई थी तब एक हजार मरीज में करीब 15 मरीज संक्रमण का शिकार पाए जा