हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। बता दें कि 25 अप्रैल को सुबह करीब 10 बजे आरपी सेंटर की ओपीडी में एक मरीज के कागज पूरे न होने पर डॉ. अतुल कुमार सीनियर रेजीडेंट डॉ. विनीत सहित टीम को डांट रहे थे।
इसी वक्त डॉ. विनीत का फोन बजने लगा। डॉ. अतुल कुमार ने उनका फोन छीनने का प्रयास किया और डॉ. विनीत को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद 26 अप्रैल को दिनभर रेजीडेंट डॉक्टर विरोध करते रहे।
सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने गुरुवार देर शाम से ही हड़ताल का ऐलान कर दिया था। इसके बाद शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे हड़ताल खत्म हुई।
कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि पद्मश्री डॉ. अतुल कुमार ने अपनी गलती को स्वीकार कर लिया है। कमेटी के समक्ष उन्होंने लिखित में भी अपना पक्ष रखा है।
नियमों के तहत मामला बहुत बड़ा नहीं है। इसलिए डॉ. अतुल कुमार को बर्खास्त कर देना या उन्हें आरपी सेंटर के प्रमुख पद से हटा देना संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया है कि एम्स प्रबंधन जल्द ही अन्य सभी फैकल्टी को आगाह करने के लिए एक चेतावनी भी जारी कर सकता है।
कमेटी भी जानती है, राजनीति है हावी
एम्स के थप्पड़ कांड को लेकर कहा जा रहा था कि मामले में राजनीति चल रही है। कुछ सीनियर अपने जूनियर डॉक्टरों को भड़का रहे हैं। कुछ इसी तरह की जानकारी जांच कमेटी के सदस्यों को भी है। इनमें से कुछ का कहना है कि थप्पड़ की वजह से तीन दिन तक कैंपस में हड़ताल होना गलत है। एम्स में सभी को इस राजनीति के बारे में जानकारी है।
लटके ऑपरेशन हो सकते हैं सोमवार को
बताया जा रहा है कि एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों ने लिखित में निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया से अपील की है कि हड़ताल के चलते जिन मरीजों के ऑपरेशन टाले गए थे, उन्हें सोमवार को कराया जाए। ताकि मरीजों को और ज्यादा तकलीफ न हो सके। हालांकि बताया जा रहा है कि सोमवार को सिर्फ उन्हीं मरीजों का ऑपरेशन हो सकता है, जो एम्स में भर्ती हैं। बाहरी मरीजों को इतनी जल्दी बुलाना संभव नहीं है।