डिप्रेशन में ऐसी निकलती है गले से आवाज
एम्स के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में सैकड़ों लोगों की आवाज के नमूनों का विश्लेषण किया। शोध के दौरान यह देखा गया कि डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की आवाज में कुछ खास बदलाव होते हैं। ऐसे लोगों की बोलने की गति धीमी, आवाज की ऊर्जा कम और भावनाओं की अभिव्यक्ति कमजोर पाई गई। उनकी आवाज अक्सर सपाट और थकी हुई महसूस होती है।
समय रहते मिल सकेगा इलाज
शोध में शामिल कई लोगों में डिप्रेशन के लक्षण पाए गए, जिनकी पुष्टि बाद में मानसिक स्वास्थ्य जांच के जरिए भी हुई। आवाज आधारित तकनीक ने 60 से 75 प्रतिशत तक सटीक नतीजे दिए, जबकि लंबे समय तक रिकॉर्ड की गई आवाज में यह सटीकता और बेहतर रही। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक खास तौर पर उन जगहों पर उपयोगी हो सकती है, जहां मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी है। मोबाइल फोन या कॉल रिकॉर्डिंग के जरिए शुरुआती स्तर पर डिप्रेशन की पहचान की जा सकती है, जिससे समय रहते मरीज को इलाज के लिए प्रेरित किया जा सके।
यह एक सहायक तकनीक है
हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी साफ किया है कि यह तरीका किसी डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है, बल्कि एक सहायक तकनीक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, डिप्रेशन एक गंभीर बीमारी है और इसके इलाज के लिए विशेषज्ञ सलाह जरूरी है। इस नई तकनीक से डिप्रेशन की पहचान आसान, सस्ती और जल्दी हो सकेगी, जिससे कई लोगों की जिंदगी बेहतर बनाई जा सकती है।