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योग और अध्यात्म से दूर होगी बीमारी: मरीजों के लिए दवाई नहीं है जरूरी, आहार और अध्यात्म पर देना होगा ध्यान

Wed, 23 Aug 2023 07:37 AM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

मरीजों के इलाज में केवल दवाएं ही जरूरी नहीं, बल्कि उसके आहर-विहार को समझकर इलाज देना महत्वपूर्ण है। यह तभी कारगर होगा जब डॉक्टर संवेदनशील होंगे और ऐसा करने के लिए योग और आध्यात्म का सहारा लिया जाएगा। 
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योग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चिकित्सा सुविधा में सुधार के लिए एम्स अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) और हार्टफुलनेस के साथ मिलकर बुधवार से तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। चिकित्सा और ध्यान- मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिकता के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल को ऊपर उठाने के विषय पर होने वाले इस सम्मेलन के माध्यम से डॉक्टरों को संवेदनशील बनाने की पहल की जाएगी। आने वाले दिनों में इसे डॉक्टरों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा।

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डॉक्टरों से मारपीट की घटना में आएगी कमी
इस सम्मेलन के बारे में एम्स के फिजियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. केपी. कोचर ने बताया कि मरीज के उपचार के लिए यह जानना जरूरी है कि वह कहां से आया है, वह क्या खाता है, उसकी समस्या किस स्तर की है। इसे जानने के लिए डॉक्टर को संवेदनशील होकर जानकारी लेनी होगी। इससे न केवल मरीजों को फायदा होगा, बल्कि डॉक्टरों के साथ होने वाली मारपीट की घटनाएं भी कम होंगी। मरीज की बीमारी जानने से उपचार आसान हो जाएगा।

योग, ध्यान और उपचार
इस सम्मेलन में चिकित्सा और आध्यात्मिकता के बीच सहजीवी संबंध का पता लगाने के लिए शिक्षाविद, शोधकर्ता, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर और आध्यात्मिक चिकित्सक मंथन करेंगे। इसकी मदद से मानवीय मूल्यों, भारतीय आध्यात्मिकता और ध्यान पर प्रकाश डाला जाएगा। इस आयोजन के लिए वर्तमान चिकित्सा देखभाल और शिक्षा की सीमाओं से लेकर चिकित्सा नैतिकता से लेकर भावनात्मक और मानसिक कल्याण तक की कम से कम दस व्यापक थीम तैयार की गई हैं।
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एम्स ने किया अध्ययन
एम्स ने गूगल फॉर्म के साथ मिलकर एक अध्ययन किया। इसमें देखा गया कि डॉक्टरों को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम और डॉक्टरों की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्या गैप है। इस अध्ययन में युवा डॉक्टर से लेकर सीनियर डॉक्टरों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि स्वास्थ्य पठन कार्यक्रम और स्वास्थ्य सुविधा देने के तरीके में काफी गैप है। इस अध्ययन के बारे में डॉ. कोचर ने बताया कि डॉक्टर-डॉक्टर के बीच विवाद है। इससे स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए विशेष सत्र शुरू किया गया है। 

फिलहाल यह नए डॉक्टरों के लिए है। इनमें ट्रेनिंग के दौरान युवा डॉक्टरों को शुरू के दस दिन डांस, संगीत, नाटक व अन्य के बारे में पढ़ाया जाता है। उन्हें योग, आध्यात्म व अन्य की जानकारी देकर संवेदनशील बनाया जाता है। साथ ही सिखाया जाता है कि मरीजों के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्हें बताया जाता है कि पैसा ही सब कुछ नहीं है। इस कोशिश के बाद देखा जा रहा है कि डॉक्टरों में काफी बदलाव आ रहा है। बीते दो साल से इसपर काम किया जा रहा है। डॉक्टरों को अमीर, गरीब, दिव्यांग व अन्य का भेदभाव से दूर रहने के लिए संवेदनशील बनाया जा रहा है।

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