चैटबॉट की मदद से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर मिलेगी काउंसलिंग
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर एप को एम्स दिल्ली, एम्स भुवनेश्वर और इहबास के लिए किया लॉन्च
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स ने बुधवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर नेवर अलोन नाम से एक एआई आधारित एप को लॉन्च किया। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार और मेडिकल छात्रों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों से निपटने के लिए यह एप विकसित किया गया है। इस ऐप को मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए तैयार किया गया है।
फिलहाल एप को एम्स दिल्ली के साथ-साथ एम्स भुवनेश्वर और इहबास में लॉन्च किया गया है। भविष्य में दूसरे विश्वविद्यालय के छात्र भी एप की सुविधा का लाभ ले सकेंगे। इस एप की मदद से पांच से छह मिनट की चैटिंग में समरी रिपोर्ट तैयार होगी। अगर कोई लक्षण दिखते है तो काउंसलिंग का सुझाव दिया जाएगा। एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार ने बताया कि एप में स्क्रीनिंग, इंटरवेंशन और पोस्ट इंटरवेंशन फॉलोअप की सुविधा शामिल है। नेवर अलोन एक वेब आधारित अत्यधिक सुरक्षित एप है जिसे व्हाट्सएप के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थानों में छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण विशेषज्ञों द्वारा वर्चुअल और ऑफलाइन परामर्श के साथ नेवर अलोन तक 24X7 पहुंच प्रदान करना है।
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एप से जांच में 70 पैसे होंगे खर्च
एप पर अत्यधिक सुरक्षित और व्यक्तिगत तरीके से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की बुनियादी जांच की लागत प्रति छात्र प्रति दिन केवल 70 पैसे है। ग्लोबल सेंटर ऑफ इंटीग्रेटिव हेल्थ के जरिये बिना किसी वित्तीय बोझ के सभी एम्स को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। छात्रों को इस एप की सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए संस्थानों को एम्स दिल्ली से संपर्क करना होगा। इस सेवा की सदस्यता लेनी होगी। उन्होंने कहा कि आत्महत्या एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगभग 7,27,000 लोगों की जान चली गई। प्रतिदिन 1925 यानी हर 45 सेकंड में एक आत्महत्या होती है। इनमें से लगभग 73 फीसदी आत्महत्याएं निम्न-आय और मध्यम-आय वाले देशों में हुई है।
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पिछले 56 वर्षों में 2022 में हुई सबसे अधिक आत्महत्याएं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2022 में 1,70,924 लोगों ने आत्महत्या की। यह 56 वर्षों में सबसे अधिक थी। छात्र आत्महत्या देश सहित दुनियाभर में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है। 2022 में 18 से 30 वर्ष की आयु के युवा वयस्कों की आत्महत्या के मामलों में सबसे बड़ी 35 फीसदी की हिस्सेदारी थी। इसके बाद 30 से 45 वर्ष की आयु के वयस्कों का स्थान था, जिनकी आत्महत्याओं के अनुपात में 32 फीसदी हिस्सेदारी थी।
सोच में बदलाव की वकालत
डॉ. नंद कुमार ने कहा कि आत्महत्या सभी देशों में प्रचलित है। इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। आत्महत्या की रोकथाम के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण आत्महत्या और इसकी रोकथाम के बारे में हमारी सोच में बड़े बदलाव की वकालत करता है। इसमें प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या में वृद्धि भी शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि उच्च आय वाले देशों में आत्महत्या और मानसिक विकारों (अवसाद और शराब के सेवन संबंधी विकार) और पहले की गई आत्महत्या के प्रयास के बीच संबंध अच्छी तरह से स्थापित है।आर्थिक समस्याओं, रिश्तों में विवाद, या पुराने दर्द और बीमारी जैसे जीवन के तनावों से निपटने की क्षमता में कमी आ सकती है।
70-80 फीसदी लोग नहीं कराते है इलाज
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित 70-80 फीसदी लोग इलाज नहीं करवाते है। इलाज में अंतराल का एक महत्वपूर्ण कारण जागरूकता का अभाव और कलंक है। मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता के अलावा जागरूकता और कलंक भी इलाज न करवाने के महत्वपूर्ण कारण हैं। यह बात उन मेडिकल कॉलेजों में आत्महत्या की घटनाओं से स्पष्ट होती है जहां मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक उपलब्ध हैं।