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मेडिकल कॉलेज में नियुक्त होंगे 242 फैकल्टी

Wed, 20 Jan 2016 12:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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कासना में मेडिकल यूनिवर्सिटी के बजाय मेडिकल कॉलेज कोे कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही फैकल्टी नियुक्ति की योजना बन गई है। कॉलेज में 242 फैकल्टी नियुक्त किए जाएंगे।
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इसके बाद मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) निरीक्षण कर मान्यता देगी। उम्मीद है कि मई से एमबीबीएस का पहला सत्र शुरू हो जाएगा।

कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कॉलेज अपनी स्थापना के लिए रजिस्ट्रेशन का आवेदन करने जा रहा है। संस्थान के निदेशक डॉ. एके भट्ट ने बताया कि एम्स की ही तर्ज पर ग्रेटर नोएडा मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई होगी।

शुरुआती दौर में एमबीबीएस की 150 सीटों पर दाखिले दिए जाएंगे। आगे चलकर और भी पाठ्यक्रम शुरू होंगे। छात्रों को पढ़ाने के लिए 242 फैकल्टी नियुक्त किए जाने हैं।
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कैबिनेट से आदेश आते ही विज्ञापन जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सारी प्रक्रियाएं समय से पूरी होने के साथ ही मई 2016 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की पूरी कोशिश है।

निदेशक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग बनाने के लिए गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (जीबीयू) ने 56 एकड़ जमीन दी है, जिस पर अब निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। तब तक कक्षाएं जीबीयू के डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज में चलेंगी।

छात्रों को रहने के लिए विवि द्वारा एक गर्ल्स और एक ब्वॉयज हॉस्टल दिया गया है। शुरुआती सत्र में फैकल्टी के रहने की सुविधा भी जीबीयू में ही रहेगी।

मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस समेत सभी पाठ्यक्रमों की मान्यता किंग जॉर्ज्स मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ से होगी। छात्रों को केजीएमयू यूनिवर्सिटी की ही डिग्री मिलेगी। दाखिला प्रक्रिया यूपीसीपीएमटी के जरिये होगी। शासन द्वारा होने वाली काउंसिलिंग से ही सीटें आवंटित की जाएंगी।

बसपा सरकार में कासना में 15 एकड़ में फैले 600 करोड़ रुपये की लागत से बने ग्रेटर नोएडा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल की शुरुआत अप्रैल 2013 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी।

इसे मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए 2014 में कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिली, लेकिन राज्यपाल की अनुमति नहीं मिली।

इसके बाद अब मेडिकल इंस्टीट्यूट बनाने का प्रस्ताव पास हुआ है। मौजूदा समय में संविदा पर 14 डॉक्टरों के साथ ओपीडी चल रही है।

सस्ती पढ़ाई की जगी उम्मीद
ग्रेटर नोएडा। मेडिकल कॉलेज की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मेडिकल की तैयारी कर रहे इंटरमीडिएट (बायो) के छात्र-छात्राओं में अपने ही शहर में सरकारी और सस्ती पढ़ाई की आस जगी है।

छात्रों को घरेलू वातावरण में एमबीबीएस समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा, इस बात की उन्हें खुशी है। छात्रों ने अमर उजाला से बातचीत कर साझा किए अपने विचार।

जीबीयू परिसर में होगी पढ़ाई
मेरी सीपीएमटी की तैयारी चल रही है। उम्मीद है कि इस साल दाखिले का मौका मिले। शहर में मेडिकल कॉलेज का खुलना हम जैसे छात्रों के लिए काफी अच्छा है। घरेलू वातावरण में पढ़ने का मौका मिलेगा। - अनुराधा कौशल, छात्रा

सरकारी मेडिकल कॉलेज की शुरुआत होने से मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहर में नहीं जाना पड़ेगा। शहर में ज्यादातर राजकीय और निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की सुविधा है। - गुड्डी खानम, छात्रा
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