संक्रमण का खतरा होगा कम
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया ने कहा कि बिस्तर पर रहने वाले मरीजों के लिए मल त्याग करना एक बड़ी चुनौती है। यह न केवल संक्रमण को न्यौता देता है, बल्कि मरीज के सम्मान को भी ठेस पहुंचाता है। देश में हर साल हजारों मरीजों को लंबे समय तक बिस्तर पर रहकर मल का त्याग करना पड़ता है। यह किट मरीज के मलाशय से जुड़कर मल को सीधे बैग में पहुंचा देता है। इससे संक्रमण होने का खतरा पूरी तरह से खत्म हो जाता है। साथ ही मल त्यागने के बाद उसे साफ करने के लिए किसी पर निर्भर रहने की भी जरूरत नहीं रहती।
ऐसे करेगा उपकरण काम
इस उपकरण के एक हिस्से को शरीर के पिछले भाग में लगाया जाएगा। इस हिस्से में एक विशेष ट्यूब है जो शरीर के पिछले हिस्से (मलाशय) में जाकर मल के रास्ते को कवर करेगा। मरीज जब भी मल का त्याग करेगा। वह करीब डेढ़ मीटर पाइप के रास्ते बैग में जमा हो जाएगा। मल से बैग भर जाने के बाद आसानी से उस बैग को बदला जा सकता है। इस उपकरण को एक बार लगाने के बाद 29 दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
शरीर पर मल लगने से होती है परेशानी
- 22% मरीजों में बढ़ जाता है संक्रमण
- 7 फीसदी मरीजों में संक्रमण से हो सकते हैं दूसरे रोग
- संक्रामक रोगों से बढ़ जाता है मौत का आंकड़ा
- आईसीयू में भर्ती मरीजों को ज्यादा दिन रहना पड़ता है भर्ती
बिस्तर पर शौच से होती हैं ये बीमारियां
- बेडसोर (दबाव अल्सर)
- मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई)
- त्वचा संक्रमण
- खून रिसाव के दौरान मल का मिलना