फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट में 40 फीसदी लोग हो रहे हैं पास

Sat, 17 Aug 2019 03:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण कुमार, नई दिल्ली
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
विज्ञापन
सराय काले खां ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक टेस्ट (एडीटीटी) में लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले आवेदकों में से करीब 40 फीसदी ही ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट को पास कर पा रहे हैं। 
विज्ञापन


इतना ही नहीं लाइसेंस बनवाने के लिए किसी भी बड़े पद की अप्रोच इस सिस्टम को प्रभावित नहीं कर पा रही है। खास बात यह है कि यहां फेल होने के बाद भी आवेदक ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर (एडीटीसी) की पारदर्शिता पर सवाल नहीं उठा रहे।

सूत्रों के मुताबिक सराय काले खां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में करीब तीन माह पहले पास होने वालों की संख्या करीब 25 फीसदी थी और यहां लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले लोगों का दैनिक आंकड़ा करीब 300 था। 
विज्ञापन


वर्तमान में यहां पर एडीटीसी में करीब 40 फीसदी लोग पास हो रहे हैं और यहां रोज ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले लोगों की संख्या घटकर 150 से 200 के बीच पहुंच गई है। शुक्रवार को सराय काले खां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर 170 लोग लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंचे और इनमें से करीब 70 लोग यानी लगभग 40 फीसदी लोग पास हुए।

सराय काले खां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर के तहत साउथ-ईस्ट दिल्ली और आधा साउथ दिल्ली जिला आता है। ये दिल्ली के पॉश इलाके हैं और यहां नामचीन अधिकारी रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर आईएसएस, आईपीएस, नामचीन अधिकारियों और न्यायाधीशों के बच्चे भी फेल हो रहे हैं।

ऑटोमेटेड टेस्ट ट्रैक पर लगे सेंसर और कैमरों की नजर में ड्राइविंग में फेल होने वाले लोगों को कोई रियायत नहीं मिल रही है। ज्ञात हुआ है कि आला अधिकारियों के बच्चों के फेल होने पर उनसे भी दोबारा टेस्ट लिए जा रहे हैं, जब तक ड्राइविंग ट्रैक पर लगे सेंसर और कैमरों की नजर में आवेदक पास नहीं होता, तब तक उसे कोई पास नहीं कर सकता।

 
विज्ञापन

अधूरी ट्रेनिंग और आत्मविश्वास की कमी के कारण लोग हो रहे फेल

सूत्रों का कहना है कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर आते ही लोग घबरा जाते हैं और ट्रैक पर वाहन चलाते वक्त कोई ना कोई गलती कर देते हैं। हालांकि ड्राइविंग ट्रैक पर जाने से पहले लोगों को व्यक्तिगत रूप से पूरी जानकारी दी जा रही है और नियमों के बारे में बताया जा रहा है।

एडीटीसी में कैमरों और सेंसर के जरिये हो रही मॉनिटरिंग और वीडियोग्राफी की जांच में पता लगा है कि लोग ड्राइविंग की अधूरी ट्रेनिंग के लिए लाइसेंस बनवाने के लिए आते हैं, जिस कारण वे फेल हो रहे हैं। इसके साथ ही इस टेस्ट को पास करने के लिए कई लोगों में आत्म विश्वास की कमी भी देखी गई है।

वर्तमान में चल रहे हैं चार एडीटीसी
वर्तमान में मयूर विहार फेज-1, विश्वास नगर, सराय काले खां और शकूर बस्ती, चार आरटीओ ऑफिस में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर शुरू हो चुके हैं, जबकि अन्य आठ जगह लाडो सराय, राजा गार्डन, हरि नगर, बुराड़ी, लोनी रोड, रोहिणी, झडौदा कलां और द्वारका में जल्द ही ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर शुरू हो जाएंगे।

ऑटोमेटेड ट्रैक का नियम
ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट के दौरान कार लाइसेंस के लिए रिवर्स पैरलल पार्किंग, उप-ग्रेडिएंट, फॉरवर्ड-8, रिवर्स-एस, ट्रैफिक जंक्शन और एच-ट्रैक शामिल है, जबकि बाइक के लिए एस और फारवर्ड-8 ट्रैक पर बाइक चलानी पड़ती है।

टेस्ट में फेल होने के बाद भी कोई शिकायत नहीं
शुक्रवार को सराय काले खां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंचे प्रशांत कार और बाइक दोनों टेस्ट में फेल हो गए। उनका कहना है कि ट्रैक पर आकर वह थोड़े घबरा गए, जिस कारण उनसे गलती हुई। उन्हें इस सिस्टम से कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम तो बेहतर है, लेकिन यहां पास होने के लिए उन्हें फिर से एक सप्ताह बाद टेस्ट देना होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें