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एम्स का कीर्तिमान: बिना किडनी हटाए दी नई जिंदगी

Fri, 29 May 2015 02:19 PM IST
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एम्स के डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है। यहां के डॉक्टर संक्रमित या ट्यूमर वाली किडनी के उस हिस्से को काटकर अलग कर देते हैं, जहां ट्यूमर है और बिना किडनी हटाए मरीज को नई जिंदगी मिल जाती है।
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अभी तक लीवर के साथ ऐसा किया जाता था कि अगर उसका एक हिस्सा खराब हो गया है तो उसे काट कर निकाल दें और बाकी का हिस्सा अपना काम करता रहता है। मगर किडनी के मामले में ऐसा कर पाना बड़ी बात है।

इस तरह के ऑपरेशन को न्यूरॉन स्पेयरिंग किडनी सर्जरी कहा जाता है। इसकी बदौलत एम्स में अभी तक 15 मरीजों को नई जिंदगी दी जा चुकी है।

ट्यूमर के बावजूद नहीं निकालते किडनी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कंसलटेंट सर्जिकल (ऑन्कोलॉजिस्ट) डॉ. एमडी रे ने बताया कि पिछले कुछ समय से एम्स में न्यूरॉन स्पेयरिंग किडनी सर्जरी की जा रही है।

इसमें मरीज की किडनी के उसी हिस्से को हटाया जाता है जहां ट्यूमर है अथवा जिस हिस्से में संक्रमण है। अभी तक चार सेमी. तक के ट्यूमर को ही काट कर अलग किया जाता था, लेकिन अब अमेरिकी दिशा-निर्देश के अनुसार, 10 सेमी. तक का ट्यूमर होने पर भी किडनी निकालने की जरूरत नहीं।

ट्यूमर के चारों ओर एक-एक इंच अंदर तक के मांस को काट कर अलग किया जाता है और उसके बाद किडनी के बाकी बचे हिस्से की सिलाई कर दी जाती है।
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क्या है नई सर्जरी तकनीक ?

डॉ. रे का कहना है कि विश्व में 10 प्रतिशत स्वस्थ लोगों की किडनी में किसी न किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है। ऐसी स्थिति में यदि किसी मरीज की एक किडनी में कोई दिक्कत आई और उसे हटा दिया गया तो भविष्य में दूसरी किडनी में कोई दिक्कत आई तो मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है।

इसी वजह से न्यूरॉन स्पेयरिंग किडनी सर्जरी को प्राथमिकता दी जा रही है। इस तकनीक से एम्स में अभी तक करीब 15 सर्जरी की जा चुकी हैं और सभी मरीज सामान्य जीवन जी रहे हैं।

किडनी खराब होने पर भी इसे काम लायक बनाने की सर्जरी न्यूरॉन स्पेयरिंग किडनी सर्जरी कहलाती है। इसमें मरीज की किडनी के उसी हिस्से को हटाया जाता है जहां ट्यूमर है या जिस हिस्से में संक्रमण है।

अभी तक चार सेमी तक के ट्यूमर को ही काट कर अलग किया जाता था, लेकिन अब 10 सेमी. तक का ट्यूमर होने पर भी किडनी निकालने की जरूरत नहीं।
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