हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को खतरनाक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे चार साल पांच महीने की लड़की का तुरंत इलाज शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा उसके इलाज पर होने वाले खर्च के बारे में बाद में विचार किया जाएगा। न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव ने बच्ची के पिता को राहत देते हुए यह निर्देश दिया है।
बच्ची के पिता ने अदालत को बताया कि लाकडाउन के बाद उनकी आय का कोई स्रोत नहीं है। याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि उनकी बच्ची दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। इसको लेकर दिल्ली सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन देने के बावजूद भी मुफ्त इलाज नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बच्ची एक आनुवंशिक विकार से पीड़ित है। बच्ची को महंगे एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी की तत्काल जरूरत है। अगर बच्ची हर हफ्ते इलाज नहीं किया गया तो बीमारी उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी पर 50 लाख रुपए से अधिक का खर्च हो सकता है। याचिकाकर्ता इसे वहन करने में असमर्थ है। उन्होंने दलील दी कि मुफ्त इलाज से वंचित करना संविधान के गारंटीकृत बच्चों के जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।