दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हुई आगजनी की घटना और उनमें हुई मौत को देखते हुए एम्स अपने सभी परिसरों को सुरक्षित बना रहा है। सभी परिसरों में मॉक ड्रिल कर स्टाफ को आग से बचने की ट्रेनिंग दे रहा है। यह प्रक्रिया दिसंबर तक चलेगी। एम्स के उपमुख्य सुरक्षा अधिकारी के तरफ से जारी आदेश के तहत एम्स ट्रामा सेंटर से मॉडल की प्रक्रिया शुरू हुई है, जो बल्लभगढ़ स्थित एम्स के केंद्र पर खत्म होगी।
आदेश के तहत इस मॉक ड्रिल में सभी आग के उपकरण, इनके इस्तेमाल, फायर अलार्म की जांच, लोगों तक सूचना पहुंचाने की जगह, आग की घटना से लोगों को बाहर निकलना, बचाव के तरीके, आग से बचने के उपकरण का इस्तेमाल, कोड रेड की जानकारी देना शामिल है। इसके अलावा दिल्ली दमकल सेवा के माध्यम से स्टाफ को विशेष जानकारी भी दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि यदि आग की घटना में फंस जाते हैं तो इसे कैसे बाहर निकाल सकते हैं। मॉक ड्रिल के दौरान परिसर में आग जैसी घटनाएं तैयार कर उससे बचने के तरीके भी बताए जाएंगे।
आदेश के तहत 21 जुलाई को एम्स के आईआरसीएच सेंटर में मॉक ड्रिल आयोजित किया जाएगा। इसके बाद पांच अगस्त को मुख्य अस्पताल में, 20 अगस्त को प्राइवेट वार्ड 2 में, 29 अगस्त को राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र में, 4 सितंबर को सर्जिकल ब्लॉक में, 15 सितंबर को मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक में, 25 सितंबर को सीएन टावर में, 3 अक्टूबर को सीडीईआर में, 13 अक्टूबर को बीएनपीएस ब्लॉक में, 29 अक्टूबर को न्यू प्राइवेट वार्ड तीन में, तीन नवंबर को एनसीए में, 14 नवंबर को कन्वर्जन ब्लॉक में, 18 नवंबर को नई राजकुमारी ओपीडी में, 28 नवंबर को एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में, 4 दिसंबर को एनडीडीटीसी गाजियाबाद में, 17 दिसंबर को एनसीआई झज्जर में और 29 दिसंबर को सी आर एच एस पी बल्लभगढ़ में मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।