ब्लाइंड स्कूल के 28 छात्रों और 25 अन्य लोगों को एआई चश्मे किए वितरित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स दिल्ली ने मंगलवार को दृष्टिबाधित छात्रों और कम दृष्टि की समस्या से जूझने वाले लोगों को एआई आधारित चश्मे देकर उनकी जिंदगी में रंग भरने की पहल की है। एम्स के डॉ. आरपी सेंटर में नेत्र विज्ञान सामुदायिक के प्रभारी और प्रोफेसर प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि ब्लाइंड स्कूल के 28 छात्रों और कम दृष्टि व दृष्टि पुनर्वास केंद्र में पंजीकृत करने वाले 25 लोगों को यह चश्में वितरित किए गए।
एआई चश्मे की मदद से इनकी रोजमर्रा की दिक्कतें दूर हो सकेंगी। रोटरी क्लब के सहयोग से दृष्टि परियोजना के तहत यह एआई चश्में दिए गए है। यह एआई चश्मे बेहद खास है। स्मार्ट फोन की मदद से यह काम करेंगे। एआई चश्मे के इस्तेमाल को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है जिससे उसके उपयोग में आसानी हो सकें। यह एआई चश्मा किसी भी पठन सामग्री की तस्वीर लेकर उसकी रिकॉर्डिंग के तौर पर सुन सकेगा। साथ ही सेंसर की मदद से रास्ते के अवरोध को भी बयां करेगा। इसमें परिचित व्यक्ति की तस्वीर रिकॉर्ड करने पर अगर वह दृष्टिबाधित शख्स के आगे आएगा तो उसकी सूचना भी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देश भर के सर्वेक्षण बताते हैं कि 50 साल और उससे ज्यादा उम्र के ज्यादातर वयस्कों को देखने में गंभीर दिक्कत होती है जो रोजाना के काम करने में रुकावट डालती है। यह पहल न केवल आंखों की बीमारियों के चिकित्सीय प्रबंधन के लिए बल्कि दृष्टिबाधित लोगों के लिए समग्र पुनर्वास, गरिमा और सामाजिक समावेश के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता है। देश में दृष्टिबाधिता गंभीर रूप से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। देश में लगभग एक करोड़ लोग दृष्टिबाधित है और गंभीर रूप से देखने में दिक्कत के साथ जी रहे हैं। इसका ज्यादा असर बुज़ुर्गों और जरूरतमंद समुदायों पर पड़ रहा है।