विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर एम्स क्षेत्र से सटे बच्चों की देखभाल करेगा। इसके लिए दोनों ने एक संयुक्त योजना तैयार की है।
इसमें बच्चों की स्क्रीनिंग कर आंकड़ा तैयार किया जाएगा कि उनमें कौन सी बीमारी या किस पोषण तत्व की कमी है। इसके साथ ही बच्चों के खान-पान में क्या बदलाव होना चाहिए, बच्चों को क्या खाना चाहिए। इसकी जानकारी भी अब एम्स के शिशु रोग विशेषज्ञ और डब्ल्यूएचओ देंगे।
गांवों में जहां-जहां आगनवाड़ी है, उन्हें खुद भोजन बनाने के लिए भी निर्देश दिए जाएंगे। योजना को मुख्य तौर पर दो चरण शहरी और ग्रामीण में बांटा गया है।
इसके तहत एम्स और डब्ल्यूएचओ ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 50 हजार बच्चों को शामिल किया है। जानकारी अनुसार जिले में करीब साढे़ चार लाख बच्चे हैं। जिनकी आयु पांच वर्ष तक की है। इनमें से करीब दो लाख बच्चे क्षेत्र में हैं।
दरअसल, हाल ही में एक टीकाकरण राउंड कई गांवों और कॉलोनियों में आयोजित किया गया था। इस दौरान यह बात सामने आई कि कई बच्चे कुपोषण ग्रस्त है।
इसके बाद इस योजना को तैयार किया गया। एम्स के सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. गजराज ने बताया कि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए यह योजना तैयार की गई है।