सिमरन की खबर के साथ:---एम्स और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने टीबी पर नई रिसर्च शुरू की।
-बैक्टीरिया के आनुवंशिक और जैविक गुणों का होगा अध्ययन, इलाज और मरीजों की देखभाल बेहतर करने पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के इलाज और बीमारी को बेहतर तरीके से समझने के लिए एम्स नई दिल्ली और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने साझेदारी की है। दोनों संस्थानों के सहयोग से टीबी पर नई रिसर्च शुरू की गई है। इसका उद्देश्य टीबी फैलाने वाले बैक्टीरिया की अलग-अलग विशेषताओं का अध्ययन कर बीमारी के इलाज और मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के तरीके तलाशना है। यह प्रोजेक्ट एम्स के मेडिसिन विभाग में शुरू हुआ है और इसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) पहल के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिक टीबी के बैक्टीरिया के आनुवंशिक और अन्य जैविक गुणों का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही बैक्टीरिया में होने वाले बदलावों और मरीजों की बीमारी की स्थिति के बीच संबंध का भी विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, बैक्टीरिया की विशेषताओं को समझने से टीबी के उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। शोध से मिलने वाली जानकारी भविष्य में मरीजों के लिए बेहतर उपचार और देखभाल की रणनीति तैयार करने में उपयोगी होगी।
प्रोजेक्ट की शुरुआत एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. निखिल टंडन और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के दिल्ली जोन के जनरल मैनेजर एचके दास की मौजूदगी में हुई। प्रो. टंडन ने सहयोग के लिए यूनियन बैंक के एमडी एवं सीईओ आशीष पांडे और यूनियन बैंक सोशल फाउंडेशन ट्रस्ट का आभार जताया। उन्होंने कहा कि टीबी जैसी स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए चिकित्सा संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के बीच सहयोग जरूरी है। इससे शोध को बढ़ावा मिलने के साथ मरीजों को भी लाभ पहुंच सकता है।