अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया कैरम फेडरेशन (एआईसीएफ) को अपने नाम से इंडिया शब्द हटाने के एकल न्यायाधीश के निर्देश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि वार्षिक मान्यता का नवीनीकरण न होना स्वतः राष्ट्रीय खेल संघ की मान्यता समाप्त होने के बराबर नहीं माना जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि खेल संहिता (स्पोर्ट्स कोड) में मान्यता निलंबित या वापस लेने के लिए नोटिस, सुनवाई का अवसर और तर्कपूर्ण आदेश जैसी विशिष्ट प्रक्रिया निर्धारित है। नोटिस, सुनवाई का अवसर, तर्कपूर्ण निर्णय और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आदेश के अभाव में स्वतः या कल्पित रूप से मान्यता वापस नहीं ली जा सकती।
एकल न्यायाधीश ने 29 अक्टूबर 2025 को एआईसीएफ को अपने नाम से इंडिया शब्द हटाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने माना था कि केंद्र सरकार द्वारा मान्यता का नवीनीकरण न होने से संगठन राष्ट्रीय खेल संघ नहीं रह गया है। फेडरेशन को नाम, लोगो या प्रतियोगिताओं में इंडिया या इंडियन शब्द इस्तेमाल करने पर भी रोक लगाई गई थी। हालांकि टीम फ्रॉम इंडिया शब्द इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी।
-
एआईसीएफ के चुनावों से जुड़ा है विवाद
यह विवाद एआईसीएफ के चुनावों से जुड़ा है। 2023 के चुनाव को महाराष्ट्र कैरम एसोसिएशन और पांडिचेरी कैरम एसोसिएशन ने चुनौती दी थी। मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को आदेश पारित कर कहा था कि यह चुनाव खेल संहिता के उल्लंघन के कारण रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा सकता। एआईसीएफ ने इस आदेश को भी अलग से हाईकोर्ट में चुनौती दी है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 10 जुलाई 2026 के आदेश की वैधता पर उसने कोई राय नहीं दी है। यह मामला एकल न्यायाधीश के समक्ष लंबित याचिका में अलग से देखा जाएगा।