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तकनीक संभालेगी मेट्रो की, सेहत एआई करेगा निगरानी: AI इम्पैक्ट समिट में DMRC ने पेश किया भविष्य का मेट्रो मॉडल

Sat, 21 Feb 2026 07:54 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

ओवरहेड वायर की निगरानी से लेकर चलती ट्रेन के पहियों की लेजर स्कैनिंग और ट्रैक सर्किट की प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तक मेट्रो संचालन के कई अहम हिस्सों में एआई का इस्तेमाल शुरू किया जा चुका है। दिल्ली मेट्रो ने भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शन किया है।
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Delhi Metro - फोटो : सोशल मीडिया (ट्विटर)
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विस्तार
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दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) अब अपने पूरे नेटवर्क को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सुरक्षा और परिचालन प्रणाली से लैस करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। 

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ओवरहेड वायर की निगरानी से लेकर चलती ट्रेन के पहियों की लेजर स्कैनिंग और ट्रैक सर्किट की प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तक मेट्रो संचालन के कई अहम हिस्सों में एआई का इस्तेमाल शुरू किया जा चुका है। दिल्ली मेट्रो ने भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शन किया है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने डीएमआरसी के स्टॉल का दौरा कर इन तकनीकी प्रयासों की सराहना की। 

मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि यह मॉडल भविष्य में देश की अन्य मेट्रो परियोजनाओं के लिए ब्लूप्रिंट साबित हो सकता है। मेट्रो नेटवर्क में ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) यानी बिजली आपूर्ति की तारें ट्रेन संचालन की रीढ़ होती हैं। इनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असंतुलन से बड़ा हादसा हो सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए डीएमआरसी ने पैंटोग्राफ कोलिजन डिटेक्शन सिस्टम (पीसीडीएस) लागू किया है। रेड लाइन, येलो लाइन और ब्लू लाइन पर तैनात यह प्रणाली ट्रेन के पैंटोग्राफ पर लगे सेंसरों के माध्यम से ओवरहेड तारों के संपर्क की निरंतर निगरानी करती है। 
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यदि तार में असामान्य कंपन, टकराव या हार्ड प्वाइंट की स्थिति बनती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है। इससे संभावित दुर्घटना से पहले ही कार्रवाई संभव हो पाती है। इसके अलावा पिंक लाइन और मैजेंटा लाइन पर ओवरहेड वायर की एआई आधारित वीडियो मॉनिटरिंग शुरू की गई है। ट्रेन से कैप्चर की गई फुटेज को इमेज एनालिटिक्स के जरिए परखा जाता है, जिससे तारों के झुकाव, ढीलापन आदि का पता लगाया जा सके।

चलती ट्रेन में लेजर से पहियों की जांच
सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पिंक लाइन पर ऑटोमैटिक व्हील प्रोफाइल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। यह प्रणाली हाई-प्रिसीजन लेजर सेंसरों के जरिए चलती ट्रेन के पहियों की प्रोफाइल स्कैन करती है। पहियों के घिसाव, असमानता या क्रैक की पहचान तुरंत हो जाती है, जिससे समय रहते मेंटेनेंस किया जा सके। इसी के साथ पिंक और मैजेंटा लाइन पर एक्सल बेयरिंग टेम्परेचर मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैनात है। यदि किसी कोच के एक्सल में असामान्य तापमान बढ़ता है तो सिस्टम अलर्ट जारी करता है। यह तकनीक ट्रेन में आग या मैकेनिकल फेल्योर जैसी घटनाओं को कम करती है। वहीं मेट्रो संचालन में ट्रैक सर्किट सिग्नलिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें खराबी आने पर ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है। डीएमआरसी ने ग्रीन लाइन और वायलेट लाइन पर एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम लागू किया है।

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