पूरे शहर में ईद धूमधाम से मनाई गई, लेकिन सबकी निगाहें अटाली पर लगी रहीं। 25 मई को दंगे के बाद इस गांव के हालात बदल गए। इसलिए शनिवार को संगीनों के साये में नमाज अदा की गई।
सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और पूर्व परिवहन मंत्री आफताब अहमद अमन का पैगाम लेकर गांव पहुंचे। गांव में घूमकर बहुसंख्यकों को मनाया। उन्हें अल्पसंख्यकों के घर ले गए।
वहां सेवइयां खिलाईं। इस तरह दोनों पक्षों के रिश्तों में थोड़ी मिठास आ गई। अमर उजाला के फोटो जर्नलिस्ट गौरव चौधरी ने वहां के पल-पल के हालात को अपने कैमरे में कैद किया।
पेश है रिपोर्ट:
सुबह 8:30 बजे: गांव के मुख्य चौक पर बीएसएफ का बेरिकेड लगा हुआ था। मस्जिद और मंदिर के चारो ओर बीएसएफ और आरएएफ कमांडो मुस्तैद रहे।
8:55 बजे: सरकारी स्कूल के चारों ओर चप्पे-चप्पे पर सैकड़ों की तादाद में फरीदाबाद पुलिस के जवान मौजूद रहे। दो नाके लगा कर लोगों की चेकिंग करने के बाद ही स्कूल की तरफ जाने दिया जा रहा था।
9:00 बजे: गांव के सरकारी स्कूल में 50 अल्पसंख्यक एकत्र हुए। उनको मौलाना आबिद ने उन्हें अमन-चैन कायम करने की शिक्षा दी। उसी समय काली पट्टी लिए तीन लोग पहुंचे। वहां पर मौजूद लोगों और बच्चों को काली पट्टी बांधनी शुरू की। संदेश दिया कि जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक उनके मन में सरकार के खिलाफ गुस्सा कायम है।
9:20 बजे: ईद की नमाज शुरू की गई।
9:35 बजे: अल्पसंख्यकों की रिश्तेदारियों से अपने घर वापसी, गांव में भाईचारा कायम करने और अमन चैन की दुआ मांगी गई।
9:45 बजे: नमाज खत्म होने के बाद लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हुआ। लोगों ने इमाम को मुबारकबाद दी। वहीं पर एक अल्पसंख्यक मुबारकबाद देते हुए रोने लगा। देखते ही देखते तीन लोग रोने लगे। वह दुखी इसीलिए थे कि हर साल ईद पर उनके बहुसंख्यक दोस्त घर आते थे। होली-दिवाली पर वह उनके घर मुबारकबाद देने जाते थे। इस बार यह तानाबाना पहले जैसा मजबूत नहीं दिखा।
10:00 बजे: सभी लोग धीरे-धीरे कार, मोटरसाइकिल और पैदल अपने घर जाने लगे। मौलाना और शाकिर अली ने स्कूल के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों को गले लगाकर मुबारकबाद दी।
10:45: हाजी शाकिर अली अपने घर पहुंचे। उनके घर पर रिश्तेदार और गांव के लोगों ने एक बार फिर से मुबारकबाद दी।
12:30 बजे: स्वामी अग्निवेश और पूर्व परिवहन मंत्री आफताब अहमद हाजी शाकिर अली के घर पहुंचे। वहां एक-दूसरे को सेवइयां खिलाईं।
12:45 बजे: स्वामी अग्निवेश ने हाजी शाकिर अली से पूछा कि आपने बहुसंख्यकों को बुलाया या नहीं तो उनका कहना था कि हमें उनसे डर लगता है।
1:00 बजे: स्वामी अग्निवेश और आफताब अहमद बहुसंख्यकों के घर पर जाकर लोगों से अल्पसंख्यकों को ईद मुबारकबाद देने के लिए उनके घर जाने के लिए कह रहे थे। उनकी इस पहल को देखते हुए गांव के बडे़ बुजुर्ग उनके साथ चल दिए। घरों के बाहर बैठी महिलाआें को भी चलने के लिए कहा गया। उनका कहना था कि आप हमारे आदमियों को ले जाओ। हम तो उनके साथ ही हैं।
1:30 बजे: हाजी शाकिर अली के घर पर 15 बहुसंख्यक पहुंचे। गले मिलकर एक-दूसरे को नाम से बुलाकर मुबारकबाद दी।