अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) प्रशासन के रवैये के खिलाफ एम्स फैकल्टी एसोसिएशन की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री को पत्र लिखा गया है। पत्र में बर्खास्त किए गए चिकित्सक की बहाली के साथ दूसरे डॉक्टर पर की जा रही कार्रवाई को रोकने की मांग की गई है। मांग न माने जाने पर प्रशासन के खिलाफ विरोध तेज होने की बात कही गई है।
एम्स फैकल्टी द्वारा लिखे गए पत्र में कार्रवाई के लिए बनाई गई कमेटी को अनुचित ठहराते हुए इसे तानाशाही पूर्ण रवैया बताया है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में बताया गया कि मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुलदीप को जांच के बिना बर्खास्त किया गया।
फैकल्टी एसोसिएशन ने मेडिसिन विभाग के ही एक और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरविंद के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी विरोध किया है।
एसोसिएशन का कहना है कि एम्स देश का सबसे सम्मानित चिकित्सीय संस्थान है और यहां नियुक्ति एक लंबी प्रक्रिया के बाद ही होती है। इसके बाद किसी डॉक्टर के खिलाफ बिना पुख्ता जांच और दूसरे पक्ष को सुने बगैर इतनी सख्त कार्रवाई किया जाना ठीक नहीं है।