लागू होगा सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला
भाजपा शीर्ष नेतृत्व की माने तो ना सिर्फ मुख्यमंत्री बल्कि पूरे मंत्रिमंडल का खाका तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर भी चर्चा करना है। इसमें सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला लागू किया जाएगा। मंत्रिमंडल का गठन करने में सभी वर्ग को साधा जाएगा। इतना ही नहीं मंत्रिमंडल में महिलाओं को भी तरजीह दी जाएगी। ताकि विपक्ष किसी तरह का सवाल नहीं उठा सके। खास बात यह है कि मंत्रिमंडल का गठन इस तरह होगा कि पूरे देश में दिल्ली जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिनी इंडिया अपने भाषणों में कहा है, वहां तक संदेश भेजा जा सके।
मोदी की गारंटी का दिया जाएगा संदेश
भाजपा सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल का नाम तय करने के बाद शपथ ग्रहण समारोह के आयोजन को लेकर फैसला लिया जाएगा। यह देखा जाएगा कि शपथ ग्रहण को सादगी के साथ किया जाए कि एक बड़ी जीत को लेकर पूरे देश में संदेश भेजा जाए। एक मत यह भी है कि सरकार के 100 दिन पूरा होने पर किए गए वादों को पूरा कर जश्न मनाया जाए। इससे मोदी की गारंटी का संदेश भी दिया जा सकता है।
शीर्ष नेतृत्व पूरे मंत्रिमंडल का खाका तैयार करने का दिया है निर्देश
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पूरे मंत्रिमंडल का खाका तैयार करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के साथ ही सरकार और विधानसभा में मुख्य भूमिका में रहने वाले महत्वपूर्ण पदों पर भी लोगों को चयनित किया जाएगा। मुख्यमंत्री का चयन के बाद अपने मंत्री मंडल का गठन मुख्यमंत्री करते है। फिर विभिन्न विभागों को बांटा जाता है। यह चयन उनकी योग्यता, अनुभव और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर किया जाता है।मंत्री मंडल की शपथ उपराज्यपाल दिलवाते है। इसके बाद वे अपने पदों का कार्यभार संभालते हैं। विधानसभा में मंत्रिमंडल के अलावा विधानसभा अध्यक्ष होते है जो विधानसभा की कार्यवाही को संभालते है। विधानसभा के नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं। विधानसभा सचिव विधानसभा के प्रशासनिक कार्यों को संभालते हैं। जो सदस्यों को आवश्यक सहायता देते है। इसके अलावा विधि सलाहकार विधानसभा के सदस्यों को विधिक मामलों में सलाह देते है। विधानसभा के कार्यों में विधिक मामलों को देखते हैं।
इन लोगों के अलावा, विधानसभा में कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी होते हैं जो विधानसभा के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा मुख्य सचेतक विधायकों के बीच समन्वय करता है। उन्हें सरकार की नीतियों और कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। मुख्य सचेतक विधानसभा में सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्य सचेतक विधेयकों का समर्थन करता है। विधानसभा के नियमों का पालन भी सुनिश्चित कराता है। यह पद काफी महत्वपूर्ण है।