आरक्षण की मांग को लेकर पटरियों पर उतरे जाट आंदोलन और आरक्षण देने के लिए शुरू हुई सरकारी कसरत के बीच चौथे दिन बुधवार को दैनिक यात्रियों के लिए राहत भरा रहा।
आंदोलन खत्म होने के बाद बुधवार को ट्रेन पटरी पर लौटी। गुड़गांव होते हुए दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर के बीच रेल ट्रैक आंदोलनकारियों के द्वारा खाली किया जाने से सभी 90 ट्रेनों का आवागमन शुरू होने से लाखों लोगों को राहत मिली है।
हालांकि चार दिनों के आंदोलन से करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बुधवार को ट्रेन शुरू होने से सबसे अधिक राहत कामकाजी और विद्यार्थी वर्ग के यात्रियों को मिली है।
रेवाड़ी से पटौदी, गुड़गांव, दिल्ली और दिल्ली की तरफ से पालम, गुड़गांव, गढ़ी हरसरू, पातली, पटौदी, रेवाड़ी सहित बीच के स्टेशनों से प्रतिदिन करीब 70 हजार दैनिक यात्री आवागमन करते हैं।
बुधवार को पटौदी स्टेशन पर अपने तय समय पर सुबह सात बजकर 35 मिनट पर जब 54414 पेसेंजर 2आरएनटी ट्रेन (पार्लियामेंट्री ट्रेन) आई तो पटौदी के आसपास के 70 गांवों के दैनिक यात्रियों को राहत मिली। ट्रेन नहीं चलने की वजह से इसका ट्रैफिक सड़कों पर आ गया था। यात्रियों को बसों, प्राइवेट वाहन और ट्रकों में सफर करना पड़ था।
ट्रेन का सबसे अधिक राहत दूधियाओं ने महसूस की। फर्रूखनगर से गढ़ी हरसरू-गुड़गांव होते हुए दिल्ली तक आवागमन करने वाली डीईएमयू ट्रेनों के संचालन ने फर्रूखनगर क्षेत्र के फूल उत्पादक सहित कामकाजी लोगों को भी राहत प्रदान की है।
दैनिक रेल यात्री समन्वय समिति दिल्ली-रेवाड़ी सेक्शन के अध्यक्ष पीएल वर्मा का कहना है कि ट्रेनों के बंद रहने से जो भी परेशानी हुई उसको बयान नहीं किया जा सकता है।
कामकाजी लोगों के लिए रेल से सस्ता अन्य कोई भी आवागमन का साधन नहीं है। वास्तव में रेवाड़ी से दिल्ली के बीच में डेढ़ दर्जन स्टेशनों के साथ वाले सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए ट्रेन ही लाइफ लाइन है।